मध्यप्रदेश

अशोकनगर।मैं जिंदा हूं… खुद को जिंदा बताने के लिए दर-दर भटक रहा है युवक

जिंदा व्यक्ति को पंचायत ने 2 वर्ष पूर्व किया मृत घोषित - कागजो में खुद को जिंदा करवाने पांच माह से दर-दर भटक रहा यूवक

अशोकनगर से ओमप्रकाश रघुवंशी की रिपोर्ट

डिप्टी कलेक्टर को आवेदन देकर फिर से कागजों में जीवित दर्शाने की मांग
यूं तो सरकारी कार्यालयों में अनियमित ताएं एक आम बात होती है किंतु किसी जिंदा व्यक्ति को मृत बता दिया जाए जाए तो इसे एक बड़ी लापरवाही ही माना जाएगा।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में कब क्या हो जाये कुछ नहीं कहा जा सकता है। पंचायत से लेकर जिला पंचायत तक भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबी हुई है अब तो यह स्थिति हो गई है कि जिंदा व्यक्ति को भी मृत घोषित करने से नहीं चूक रहे हैं। ऐसा ही एक मामला जनपद पंचायत चंदेरी के अंतर्गत प्रकाश में आया है जिसमें जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर देने से युवक को शासन की योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
दरअसल, जनपद पंचायत चंदेरी के ग्राम खिरका टांका निवासी शिवकुमार पुत्र गोविंद अहिरवार को सन 2019 में पंचायत के सचिव एवं रोजगार सहायक द्वारा कागजी तौर पर मृत घोषित कर दिया था जबकि वे युवक आज भी जिंदा है और उसे इस बात की जानकारी भी नहीं थी कि वह कागजों में मर चुका है। इस बात की जानकारी उसे तब लगी जब 21 दिसंबर 2020 को है उसकी पत्नी कृष्णा को डिलीवरी होने के बाद संबल योजना के तहत मिलने वाले पैसों के दस्तावेज जमा करने संबंधित विभाग में पहुंचा। वहां पर उसे बताया गया कि वह कागजों में मृत घोषित हो चुका है अब उसे इस योजना का लाभ नहीं मिल सकता। जैसे ही उसे इस बात की जानकारी लगी तो पहले तो पुलिस चौकी में रिपोर्ट दर्ज कराने गया जब पुलिस द्वारा युवक की रिपोर्ट नहीं लिखी गई तो वह कलेक्ट्रेट कार्यालय में प्रशासनिक अधिकारियों से अपने खुद के जिंदा होने की प्रमाण लेकर पहुंचा जहां पर उसने बताया कि मेरे जिंदा होने के बावजूद भी पंचायत में मृत घोषित कर दिया है और जो डिलीवरी के लिए 16 हजार रुपए मिलने थे उनका लाभ भी नहीं मिल पाया लगातार 5 माह तक घूमने के बावजूद अब तक पंचायत द्वारा कागजों में जीवित घोषित नहीं किया गया। इसके कारण उसे सरकार की योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा गुरुवार को युवक ने डिप्टी कलेक्टर को आवेदन देकर पूरी दास्तां सुनाई और उसे फिर से कागजों में जीवित दर्शाने की मांग की है।

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