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कन्नोद (देवास)| किसानों को नहीं हो पा रहा बीज उपलब्ध |प्रदेश सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लाख दावे करें लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति कुछ और ही है।

 

 भरत शर्मा की रिपोर्ट

एक और सरकार के नुमाइंदे मंचो के माध्यम से किसानों के लिए कई योजनाओं का बखान करते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर यह योजनाएं पहुंचती भी है या नहीं इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। आज किसान खाद बीज के लिए दर-दर भटक रहा है। बावजूद जिसके किसानों को सही बीज उपलब्ध नही हो रहा है न ही खाद कई किसानों की हालत तो यह भी है कि उनकी स्थिति खाद्य खरीदने की भी नहीं है यह खबर सरकार के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है | ऐसा ही मामला देवास जिले के कन्नौद तहसील के ग्राम कीटिया का है जहां सोयाबीन का बीज महंगा होने से किसान ने उड़द का बीज ले आया लेकिन उसमें खाद नही खरीद पाने की वजह से नदी-नाले की काली रेत मिलाकर बोना पड़ रहा है। इस संबंध में आदिवासी किसान लक्ष्मण से चर्चा की तो किसान ने बताया कि पिछले वर्ष 5 हजार रुपये क्विंटल के हिसाब से सोयाबीन का बीज खरीदकर लाया था। और खूब मेहनत करने के बाद भी सोयाबीन का उत्पादन नहीं हुआ और कर्जे में डूब गया। इस बार बाजार में सोयाबीन के बीज के लिए गया तो सोयाबीन का बीज 10 हजार रुपये के लगभग भाव होने से खरीदने में असमर्थ था। जैसे तैसे मूंग-उडद की फसल बो रहे हैं इसका कारण यह है कि हमारे पास पैसे नहीं है इसलिए खाद के रूप में रेत मिलाकर वो रहे हैं पिछले साल हमने 5 हजार के भाव से सोयाबीन खरीदे थे और अब बाजार में सोयाबीन का भाव 10 हजार रुपये है और हम से पूर्ति नहीं हो रही जिसके कारण हम उड़द बो रहे हैं हमारे पास खाद के पैसे नहीं है तो रेत मिलाकर बो रहे हैं। किसान ने यह भी बताया कि सरकार की और से कोई सहायता नही मिली।आपको बता दे कि सोयाबीन का बीज एक एकड़ में करीब 40-50 किलो बोया जाता है। जिसकी कीमत लगभग 5 हजार रुपये है जबकि एक एकड कृषि भूमि में 8-10 किलो मूंग या उडद का बीज बोया जाता है। जिसकी कीमत लगभग एक हजार रुपये होती है। ऐसे में किसानों का सोयाबीन के बीज से मोह भंग हो गया और मूंग, उडद एवं मक्का की और आकर्षण बढ़ा है।

 

लक्ष्मणसिंह किसान

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