कैलारस(मुरैना)-शक्कर कारखाना श्रमिक, किसानों का बकाया भुगतान” प्रदेश सरकार करे, धनराशि का बंदोबस्त। धाकड़|

गिर्राज कुमार शर्मा की रिपोर्ट
जिले का एकमात्र बड़ा उद्योग शक्कर कारखाना कैलारस विगत एक दशक से ज्यादा समय से बंद पड़ा हुआ है। इस कारखाने से लगभग 20 हजार किसान परिवार तथा 1500 श्रमिक कर्मचारी जुड़े हुए थे। यह कारखाना 2009-10 में प्रदेश की सरकार वह प्रबंधन की नाकामियों के चलते बंद हुआ है। कारखाने को शुरू करने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया तक कई नेताओं ने कई बार वायदे किए हैं। लेकिन वोट लेने के बाद वायदे भूला दिए गए हैं। अभी भी कारखाने पर लगभग ₹30 करोड़ श्रमिक ,कर्मचारी और किसानों का बकाया है। इस कारखाने द्वारा 30 करोड़ से ज्यादा की राशि तो विभिन्न टैक्सों के जरिए सरकार को जमा कराई जा चुकी है। लेकिन इस सोने की अंडे देने वाली मुर्गी (शक्कर कारखाने) को राजनेताओं ने एक साथ हलाल कर दिया है। बंद कर दिया है।अभी भी उनका मकसद इस कारखाने को चलाना नहीं है। यह उद्गार वरिष्ठ किसान नेता शक्कर कारखाने के पूर्व संचालक गयाराम सिंह धाकड़ ने व्यक्त किए। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को वायदा निभाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी अपने वादे को निभाते हुए कारखाने को चलवाना चाहिए। मुख्यमंत्री इस दिशा में पहल करें । चुनाव के समय जातिवाद की दुहाई देकर, झूठे वायदे कर वोट बटोर लिए जाते हैं। फिर आम जनता और किसानों की सुनवाई नहीं की जाती है । साथ ही उन्होंने कहा है कि यह कारखाना जनता की धरोहर है। कोऑपरेटिव का गठन जनता द्वारा किया गया था। इसे खुर्द-बुर्द करने का अधिकार किसी सरकार को नहीं है। उन्होंने आगे अपने वक्तव्य में कहा कि कॉपरेटिव के मामले में केरल ने देश में कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रदेश सरकार उससे भी सबक ले सकती है। परंतु वह नहीं लेंगे । किसान नेता ने कहा है कि इस संबंध में किसान और मजदूरों की ओर से लगातार आंदोलन किए जाते रहे हैं। दर्जनों श्रमिक कर्मचारी, भुखमरी और बीमारियों के चलते असमय काल काल्वित हो गए हैं। लेकिन यह सरकार सुनने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि कारखाने को नहीं चलाया गया। किसान श्रमिकों का भुगतान नहीं किया गया। तो भविष्य में किसान संयुक्त मोर्चा के बैनर तले आंदोलन की शुरुआत करेंगे। जिसका साथ कारखाने के श्रमिक,कर्मचारी भी देंगे। उन्होंने किसानों श्रमिकों और आम जनता से भी आगे बढ़कर कार्यवाही करने का आग्रह किया है।


