मध्यप्रदेश

छिंदवाड़ा पुलिस की वर्दी पर चढ़ा इंसानियत का रंग

रंजीत और 20 साथियों ने वृद्धाश्रम में भेंट की भाप की 50 मशीनें

जुन्नारदेव से ज्ञानेश्वर विश्वकर्मा की रिपोर्ट

बदलते दौर में इंसान का इंसान बने रहना एक बहुत बड़ी बात है। रंग बदलती इस दुनिया में अगर कोई दूसरों का दर्द लेने को हर वक्त तैयार रहे तो उस हमदर्द इंसान के लिए जो लिखा जाए वो कम होगा। कोरोना काल में वर्दी की हमदर्दी भी देखने को मिली। पुलिस कोरोना काल में अलग-अलग हमदर्द के रूप में दिख रही है। इस संकट के समय में खाकी पर इंसानियत का रंग चढ़ा दिख रहा है। बात कर रहे हैं छिंदवाड़ा पुलिस में आरक्षक के पद पर तैनात प्रधान आरक्षक रंजीत राजपूत और उन 20 जवानों की, जो पुलिस में तो हैं लेकिन उनके दिल में संवेदनशीलता मासूम बच्चों सरीखी है। इन पुलिसकर्मियों ने इस कोविड के दौर में न सिर्फ विभाग के सहकर्मियों की बल्कि शहर के वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की भी सुध ली। रंजीत राजपूत ने बीत रोज अपने साथियों के मिलकर वृद्धाश्रम में भाप लेने की 50 मशीनें भेंट की और वृद्धजनों के साथ समय बिताकर उन्हें अपनेपन का अहसास कराया।

रंजीत के साथ गु्रप में शामिल नंदू, सुधीर रंगारी, शिवकरण, शकीला, पवन, विजय, कन्हैया, कैलाश, राधेश्याम, महेश, आशा, योगेश, सलीम, परवेज, राजेंद्र ने वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों का आगे भी ख्याल रखने का संकल्प लिया।

यह सभी पुलिसकर्मी छिंदवाड़ा सहित अन्य स्थानों पर अलग अलग स्थानों पर तैनात हैं लेकिन कोरोना के पिछले काल से लेकर अब तक सैंकड़ों लोगों की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष मदद कर रहे हैं। कभी खाना बांटकर कभी राशन किट देकर…कभी दवाईयां देकर, कभी भाप की मशीन बांट कर…

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