कोयला खदान एयरफोर्स में होने वाले धमाको से अछूता नहीं औद्योगिक क्षेत्र

गजेन्द्र सोनी दिवाकर न्यूज़ बैतुल सारनी
सारनी। कोयला खदानों और एयरफोर्स में होने वाली धमाकों की गूंज से औद्योगिक क्षेत्र भी अछूता नहीं है।
नगर पालिका क्षेत्र में धमाको की गूंज से लोग हैरान-परेशान हैं।
अवैध खनन के लिए जिस तरीके से अवैध ब्लास्टिंग का उपयोग किया जा रहा है उसमें रानीपर चोपन,आमला तहसील सबसे आगे है। यहां व्यापक पैमाने पर ब्लास्टिंग के लिये अवैध बारूद का उपयोग हो रहा है।
खनन कारोबार से जुड़े लोगों ने नाम न छापने पर बताया की घोड़ाडोंगरी तहसील में स्टोन क्रेशरों पर सबसे बड़ा अवैध खनन होता है। पत्थर तोडऩे के लिये यहां बड़े पैमाने पर अवैध ब्लास्टिंग की जाती है। चूंकि ज्यादातर कारोबार अवैध खनन का होता है ऐसे में इन्हें ब्लास्टिंग की अनुमति होती नहीं है और बड़े धमाके किये जाते है धमाके की तीव्रता मापने के काम करने वाली एजेंसी कभी नही आती है कि स्टोन क्रेशर पर किस तीव्रता के कितने धमाके किये जा रहे है और अनुमति कितनी तीव्रता के धमाके करने की दी गई है ।बड़ी मशीनों से चार और छह इंच के 50 से लेकर 100 फिट तक बोर किये जाते है और 25 ,25 और 50 ,50 किलो अमोनिया नाइट्रेट एक एक बार मे एक बोर भरा जाता है और एक बार मे एक स्टोन क्रेशर पर एक हजार फीट से लेकर 2दो हजार फीट तक बोरिंग के 100 से लेकर 200 बोर किये जाते है ।
पत्थर का दो नंबर का खनन करने के लिये जिले भर में कई कम्प्रेशर संचालक सक्रिय है। इनके द्वारा ट्रैक्टर संचालित कंप्रेशर के माध्यम से होल किया जाता है। जिसमें विस्फोटक रसायनों का उपयोग कर विस्फोट किया जाता है। इस प्रक्रिया में नाइट्रेट मिक्चर, डेटोनेटर, सेफ्टी फ्यूज आदि का उपयोग होता है। यह सामान अवैध खनन में चोरी छिपे इस्तेमाल किया जाता है। जिसकी सप्लाई ब्लास्टिंग कारोबारी बैक डोर से करते हैं।
स्टोन क्रशर विस्फोटक रसायन की सप्लाई दुभ सुबह होती है इसमे एक्सप्लोसिव वैन या फिर देर रात खदानों के पास या खदान संचालकों के पास पहुंचती है। इसके बाद यहां नाइट्रेट मिक्चर (अमोनियम नाइट्रेट), डेटोनेटर आदि सामग्री उतार दी जाती है। इस काम में बिना नंबर की एक्सप्लोसिव वैन ज्यादातर देखी गई है। इस क्षेत्र में एक खदान संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मंहगे दामों पर माल लेते हैं। यह भी बताया गया है कि क्षेत्र में विस्फोटक की दो नंबर की सप्लाई होती है।
अवैध ब्लास्टिंग के कारोबार में क्षेत्र के ज्यादातर क्रेशर संचालक शामिल हैं। इनके द्वारा पत्थर का अवैध खनन किया जाता है जहां दो नंबर का बारूद इस्तेमाल होता है। लेकिन कभी गंभीरता से जांच नहीं होने के कारण ये बच जाते हैं। यदि क्रेशर द्वारा उपयोग की गई विद्युत की अकेले जांच कर ली जाए तो यह पता चल जाएगा कि इस क्रेशर से कितना मटेरियल निकला। जिसका वैधानिक तौर पर दिये गये पास से मिलान करके अंतर पता किया जा सकता है। यह अवैध खनन होगा और इसकी गहराई से जांच होगी तो अपने आप अवैध बारूद के उपयोग का खुलासा हो जाएगा। लेकिन अधिकारी खुद इस मामले में चुप्पी साधे रहते हैं।


