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छिंदवाड़ा-धरना देकर कामगार कांग्रेस ने अनुकंपा पीडि़त परिजनों के लिए उठाई आवाज मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन, भोपाल रवाना हुआ प्रतिनिधिमंडल

कामगार कांग्रेस ने बापू की प्रतिमा में धरना देकर अनुकंपा नियुक्ति की मांग की

तरुण मेहरा की रिपोर्ट

धरना देकर कामगार कांग्रेस ने अनुकंपा पीडि़त परिजनों के लिए उठाई आवाज

मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन, भोपाल रवाना हुआ प्रतिनिधिमंडल

छिंदवाड़ा। कोरोना एवं कोरोना से पहले मृत शासकीय सेवकों के अनुकंपा आश्रित परिजनों के लिए असंगठित कामगार कांग्रेस ने बापू की प्रतिमा में धरना देकर अनुकंपा नियुक्ति की मांग की। चार घंटे तक चले धरने में 100 से अधिक पीडि़त परिजन शामिल हुए। धरने के बाद सिवनी के तुसार बिसेन के साथ एक प्रतिनिधिमंडल भोपाल रवाना हुआ, जहां वह 9 अगस्त को सुबह पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथजी से मुलाकात कर अनुकंपा पीडि़त परिवारों की ओर से ज्ञापन सौंपेंगे। धरने में कामगार कांग्रेस के जिला अध्यक्ष वासुदेव शर्मा, अनुकंपा पीडि़त परिजन संघ के अध्यक्ष किरण कुमार बंशगोतिया, क्रिस वाणे, रोमी यादव, श्रीधरम पहाड़े, दीपक सिंगोतिया, मुरारी यादव, संजय वर्मा, केशव नवरेती, सोनू यादव, अरविंद ठाकरे, शुभम जुननकर, शिखा सिंह, सुधाकर ओक्टे, प्रेमकुमार कवरेती, श्याम कुमार आठनकर, काजल पटेल, सिवनी जिले के इरफान शाह, हर्षित जोशी, देवेंद्र कुमार सेन, सत्यम रांहगडाले, राहुल शेंडे सहित एमपीईबी, शिक्षा, ट्राईबल, वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पीडब्लूडी, पीएचई, जलसंसाधन विभागों के अनुकंपा पीडि़त शामिल हुए। 12 बजे से शुरू हुआ धरना 4 बजे तक चला, धरना स्थल पर प्रशासन की ओर से तहसीलदार ने पहुंचकर अनुकंपा पीडि़त परिजनों की ओर से ज्ञापन लिया और उसे उच्चस्तर पर कार्रवाई के लिए भेजने का भरोसा दिया। अनुकंपा पीडि़त परिजनों के धरने को संबोधित करते हुए कामगार कांग्रेस के जिला अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कहा कि मप्र में 2003 के बाद से अनुकंपा नियुक्तियां बंद हैं, जिन्हें अनुकंपा से वंचित किया गया है, वह सभी छोटे कर्मचारी है, अधिकारियों के परिजनों को तो अनुकंपा दे दी जाती है, लेकिन क्लास-तीन एवं चतुर्थ श्रेणी के मृत कर्मचारियों के परिजन अब तक अनुकंपा के लिए भटक रहे हैं। शर्मा ने कहा कि माननीय कमलनाथजी ने 2018 के विधानसभा चुनाव के वचनपत्र में विशेष अभियान चलाकर अनुकंपा नियुक्तियां देने का वचन दिया था, इसके लिए उन्होंने सभी विभागों से जानकारियां भी एकत्रित कराईं, जिसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा विभाग में कुछ अनुकंपा नियुक्तियां दी भी गईं, लेकिन कमलनाथ सरकार गिरने के बाद फिर बंद कर दिया गया। एमपीईबी में अनुकंपा नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद वहां भी बंद कर दी गई। शर्मा ने कहा कि कोरोना में बड़ी संख्या में शासकीय सेवकों को मौत हुई है, इनके साथ भी शिवराज सिंह की सरकार छलावा कर रही है। 30 जुलाई को शासन ने कोरोना में मृत शासकीय सेवाकों के परिजनों को नियुक्ति पत्र वितरण का कार्यक्रम किया, जिसका हर जिले में सीधा प्रसारण किया गया लेकिन यह कार्यक्रम अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर धोखा साबित हुआ है। छिंदवाड़ा जिले में कोरोना की पहली एवं दूसरी लहर में 300 से अधिक शासकीय सेवाकों की मृत्यु हुई है, लेकिन अनुकंपा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में इनमें से सिर्फ 5 को अनुकंपा नियुक्ति दी गई। अनुकंपा पीडि़त परिजन संघ के अध्यक्ष किरण कुमार बंशगोतिया ने कहा कि मृत शासकीय सेवाकों के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने को लेकर मप्र सरकार का रवैया सही नहीं रहा। कोरोना महामारी के बाद चर्चा में आए अनुकंपा नियुक्ति के सवाल के बाद पता चला कि मध्यप्रदेश में 15 साल से कई विभागों में अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी गई, जिस कारण लगभग 15 हजार से अधिक अनुकंपा के मामले अभी भी पैंडिंग हैं। एमपीईबी में लगभग 5,000 हजार अनुकंपा के मामले पैंडिंग हैं। पीडब्लूडी, जल संसाधान एवं पीएचई जैसे निर्माण विभागों में भी 4000 से अधिक अनुकंपा के मामले पैंडिंग हैं। शिक्षा विभाग में कोरोना एवं कोरोना से पहले कई शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक कार्य में कार्यरत शासकीय सेवाकों की मृत्यु हुई है, इस विभाग में भी लगभग 3-4 हजार अनुकंपा नियुक्ति के मामले पैंडिंग हैं, यही स्थिति स्वास्थ्य, फारेस्ट सहित सभी विभागों की है। असंगठित कामगार कांग्रेस जिला छिंदवाड़ा की ओर से एक सूत्रीय मांगपत्र दिया गया है जिसमें मांग की गई कि एमपीईबी, शिक्षा विभाग, निर्माण विभागों सहित सभी विभागों के, सभी श्रेणी के कर्मचारियों एवं श्रमिकों के मृत शासकीय सेवाकोंं के परिजनों को तत्काल अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों के निराकरण के लिए शासन की ओर से विशेष अभियान चलाया जाए।

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