कोरोनाकाल मे बेरोजगारी और पलायन का दंश झेल रहे ग्रामीण मजदूर

By Rohit Kumar Ojha
बुढ़ार से संजीत सोनवानी कि रिपोर्ट
कोरोनाकाल मे बेरोजगारी और पलायन का दंश झेल रहे ग्रामीण मजदूर
ग्रामीण क्षेत्रों में मशीनों से हो रहा कार्य मजदूर हुए पलायन करने को मजबूर
देश के मुखिया भले ही रोजगार के कार्यक्रमों को लेकर कोरोना काल के बाद आमजन जीवन को पटरी पर लाने के तमाम प्रयासों पर लगे हैं प्रदेश के मुखिया इसे हर संभव गति देने के लिए जिम्मेदारों को निर्देशित कर चुके हैं लेकिन यह निर्देश महज कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। हालत यह हैं कि विकास कार्यो की आड़ में कुछ स्थानीय रसूखदार अधिकारियों से सांठ-गाँठ कर शासकीय राशि के बंदरबाट में लगे हुए है बल्कि जिम्मेदारों इनकी काली कमाई में सहभागी नजर आ रहे है। ऐसा इसलिए भी है कि हो रहे विकास कार्यों में गाइडलाइनों की खुले आम न सिर्फ अनदेखी हो रही है बल्कि स्थानीय मजदूरों को रोजगार न देकर मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है।शासन की मंशा है कि कोरोना कल में बेरोजगारी और पलायन का दंश झेल रहे ग्रामीण मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध हो लेकिन मजदूर रोजगार के लिए अभी भी भटक रहे है,वही अधिकारियों से साथ साठ-गांठ कर अघोषित ठेकेदार नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।मामला बुढार जनपद के ग्राम पंचायत बिछिया जैसे तमाम गांवो का है जहाँ विकास की आड़ में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। कुछ ऐसा ही मामला ग्राम बिछिया से सामने आया है जहाँ लाखों की राशि से बनने वाले ग्रेवल सड़क में न सिर्फ पूरी तरह से मशीनों का स्तेमाल हो रहा है बल्कि खुलेआम ऐसे मटेरियल का भी स्तेमाल जारी है जो इस सडक की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं ।ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों की जगह मशीनों से पंचायतों में कार्य कराए जा रहे है जिससे मजदूर वर्ग पलायन के लिए मजबूर हो रहा है
नेहा और हर्ष का साथ लगातार हो रहा बंदरबाट
जनपद पंचायत बुढार के तमाम गाव में अपनी जिम्मेदार भूमिका निभाने वाली एसडीओ नेहा गोस्वामी इन दिनों चर्चा में है सूत्र बताते हैं कि बिछिया सहित दर्जन भर से ज्यादा ऐसे ग्राम एसडीओ नेहा गोस्वामी के इशारे पर भ्रष्टाचार का यह खेल खेला जा रहां है। जानकारों की माने तो नेहा गोस्वामी की पदस्थापना से ही उनके कार्यक्षेत्र में हर्ष सिंह व राजेश सिंह नाम के अघोषित ठेकेदार अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है और इनके क्षेत्र में आने वाले समस्त ग्राम पंचायतों में इनकी जमकर तूती बोल रही है। ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्यों में कहने को तो निर्माण एजेंसी पंचायत होती है लेकिन इसकी पूरी कमान हर्ष सिंह जैसे अघोषित ठेकेदारों के हाथ में है। कार्यों की स्वीकृति से लेकर उनके क्रियान्वयन और भुगतान का पूरा खाखा इन अघोषित ठेकेदारों के द्वारा तैयार किया जाता है . जिसमे जिमेदार अधिकारियों की बड़ी भूमिका तो होती है लेकिन गुणवत्ताविहीन कार्य पर इनकी मूक सहमती और मूल्यांकन और भुगतान में इनकी सहमती नजर आती है।
क्या कहते हैं नियम
वैसे तो ग्राम पंचायतों में किये जाने वाले विकास कार्यों के लिए शासन ने बाकायदा नियम बनाए हुए हैं जिसके तहत ही सबंधित अधिकारी कर्मचारी कार्य करते हैं लेकिन नियमों को दरकिनार कर खुले आम पंचायतों में विकास कार्य किए जा रहे है जिसकी शिकायतें भी अगर होती हैं तो उन्ही अधिकारीयों को उन शिकायतों की जांच के लिए नियुक्त कर दिया जाता है जो उसी भ्रष्टाचार में शामिल होते हैं। ग्राम में किये जाने वाले विकास कार्यों की स्वीकृति से लेकर उसके क्रियान्वयन के दौरान ग्राम रोजगार सहायक,ग्राम,सचिव , उपयंत्री, एसडीओ तक की पूरी टीम कार्य कर रही होती है जिनकी जिम्मेदारी नियमों के तहत कार्य को पूरा कराया जाना होता है लेकिन यहाँ तो जो हो रहा है वह इन जिम्मेदारों की जिम्मेदारी अपर सवाल खड़े कर रहे हैं। इन जिम्मेदारों के होते हुए भी जहाँ ग्राम पंचायत एजेंसी होती है वहा अघोषित ठेकेदार उन विकास कार्यों को वेंडर बनकर पूरा कर रहे हैं।


