मध्यप्रदेशव्यापार
पहली बार सूने रहे करीला के पंडाल व्यापारियों का हुआ करोड़ों का नुकसान

अशोकनगर से रामकुमार ओझा की रिपोर्ट 

रंग पंचमी के अवसर पर लगने वाला करीला मेला कोरोना के कारण इस बार निरस्त कर दिया गया था शासन प्रशासन की मंशा थी की करीला में अधिक श्रद्धालु ना पहुंचे अन्यथा लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण कोरोना विस्फोट हो सकता था! जिसके चलते मध्य प्रदेश के अन्य शहरों में कोरोना वायरस पहुंच सकता था और अगर ऐसा होता तो प्रदेश की स्थिति भयावह हो सकती थी मेला निरस्त करने एवं श्रद्धालुओं को लाने वाले वाहनों पर सख्ती से रोक के चलते रंग पंचमी के अवसर पर करीला में महज डेढ़ से दो हजार ही है श्रधालु दर्शन करने पहुंच सके
इस दौरान मेला परिसर में ना तो कोई राई नृत्य होते देखा गया और ना ही मेला वाले रंग दिखाई दिए हालांकि प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारी जरूर पूरी मुस्तैदी से सुरक्षा एवं अन्य इंतजामों के साथ बने रहे मेला में आए श्रद्धालु माता जानकी के दर्शनों को लेकर काफी उत्साहित नजर आए एवं सुबह से देर शाम तक मंदिर के अंदर जानकी मैया की जय कारे लगाते और घूमते रहे हालांकि श्रद्धालु राई न होने को लेकर नाराज नजर आए और अधिकांश श्रद्धालुओं का कहना था मेला निरस्त करने का निर्णय सही है अन्यथा कोरोना महामारी बढ़ सकती थी जो सभी के लिए बुरा होता वहीं कुछ श्रद्धालु दमोह से भी आए थे जिन्होंने बताया कि वह लड़के की चाहत लेकर करीला आए थे और उन्हें यहां राई नृत्य कराना था परंतु प्रतिबंध के चलते करीला नृत्य नहीं करा सके
जब हमने ड्यूटी पर तैनात एसपी महोदय से बात की तो उन्होंने बताया कि हमने करीला मेला मे संख्या एकत्रित ना हो इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं और नाके नाके पर चाक-चौबंद किए हुए हैं और गहरी निगरानी जारी है और साथ ही बताया कि हर बार 20 -25 लाख श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते थे और अब की बार प्रशासन की सख्ती के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका हमने इस मेले के संबंध में राई नृत्य करने वाली महिलाओं तक यह सूचना पहुंचाई कि वह भी इस मेले में इस बार ना आए जिससे कि भीड़ इकट्ठी ना हो सकी
हमारी टीम ने जानकारी दी करीला में हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते थे जिसके कारण 20- 25 हजार दुकाने लगती थी और हमने वहां के दुकानदार से बात की तो उन्होंने कहा कि इस बार मेला ना लगने से हमारा बहुत नुकसान हुआ है और साथ ही यह जानकारी भी मिली है कि अशोक नगर के बस स्टैंड पर गुना के हनुमान चौराहे पर हजारों की संख्या में बसें इकट्ठा होती थी जो कि श्रद्धालुओं को करीले तक पहुंचाती थी लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला और सारे चौराहे सूने नजर आए


