मध्यप्रदेश

बस्ती को हटाने व मकान तोड़ने की धमकी को लेकर दिया ज्ञापन।

अशोकनगर से रामकुमार ओझा की रिपोर्ट

अशोकनगर के पास नई सराय तहसील डुंगासरा रोड पर सर्वे क्रमांक 127 /5 मैं पिछले 35 से 40 वर्ष से लगातार हरिजन आदिवासी बस्ती निवास कर रही है। जो कि शासकीय है और पिछले 30 सालों से निवासरत लोगों ने कई बार कलेक्टर के पास तहसीलदार के पास आवासीय पट्टे की मांग को लेकर आवेदन दिया।

प्रार्थीगणों का कहना है कि हम उक्त जमीन पर पिछले 30-35 वर्षों से स्थाई रूप से निवास कर रहे हैं तथा झोपड़पट्टी बनाकर रह रहे हैं और शासन के द्वारा मिलने वाली सुविधा जैसे कि बिजली कनेक्शन, शौचालय भी उस जमीन पर मिला है। इसके अलावा ग्रामीणों ने बताया कि उक्त भूमि के संबंध में ग्राम पंचायत एवं राजस्व विभाग द्वारा कुछ ग्रामीणजनों को कब्जा संबंधी दस्तावेज भी दिए गए हैं।
यहां आपको अवगत कराना चाहेंगे मध्यप्रदेश शासन के मुख्यमंत्री महोदय द्वारा 29 अप्रैल 2013 एवं 26 सितंबर 2016, 3 सितंबर 2017 में एक गाइडलाइन जारी की गई थी कि जो गरीब जनता जिस भूमि पर झुग्गी झोपड़ी व मिट्टी के मकान बनाकर सामूहिक रूप से सन 2014 तक निवासरत है, उसको उसी भूमि पर आवासीय पट्टे वितरित किए जाएं तथा उक्त आदेश का पालन न करते हुए राजस्व विभाग के अधिकारी कर्मचारियों द्वारा उक्त भूमि का भेदभाव पूर्ण तरीके से सर्वे कर उक्त भूमि को नवीन तहसील की बिल्डिंग बनाने हेतु सन 2016 में आरक्षित कर ली गई थी, लेकिन वर्तमान में नवीन तहसील की बिल्डिंग का कार्य पूर्ण हो चुका है। जिसके बाद भी बाउंड्री वॉल बनाने के लिए पर्याप्त जगह भी है, लेकिन फिर भी ग्रामीणों को परेशान किया जा रहा है उस जमीन की आवश्यकता नहीं है लेकिन अपने फायदे को देखते हुए राजस्व विभाग के निरीक्षक श्री बलभद्र सिंह कौरव द्वारा कुछ झुग्गीवासीयों को उक्त भूमि का स्थाई कब्जा का प्रमाणीकरण देने का प्रलोभन देकर जुर्माना राशि ₹20000 लेने की मांग की गई जिसकी शिकायत कलेक्टर महोदय पुलिस अधीक्षक महोदय व सीएम हेल्पलाइन पर भी की गई थी। लेकिन आज दिनांक तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई झुग्गी बस्ति वालों का कहना है की राजस्व निरीक्षक श्री बलभद्र सिंह कौरव द्वारा सिर्फ ₹20000 की और मांग की जा रही है और ना देने पर प्रार्थीयों को मकान तोड़ने की धमकी दी जा रही है।
अतः कलेक्टर महोदय को आवेदन देते हुये झुग्गी वासियों ने निवेदन किया है उक्त जगह से बेदखल ना कर स्थाई रूप से उसी जगह पर आवासीय पट्टे दिए जाएं नहीं तो हमलोग वेघर होकर वेसहारा हो जायेगे तथा लाचार हो जायेंगे

 

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