ग्रामीण क्षेत्र की एकमात्र कृषि उपज मंडी बनी शोभा की सुपारी तेंदूखेड़ा में अनाज का घोष विक्रय नहीं होने से मार्केट का अस्तित्व खतरे में

तेंदूखेड़ा नरसिंहपुर से नितिन राय की रिपोर्ट
मां नर्मदा अंचल क्षेत्र तेंदूखेड़ा में इस समय पूरे क्षेत्र कृषि प्रधान होने के बावजूद मात्र एक कृषि मंडी है साथ ही तेंदूखेड़ा तहसील की सीमा से लगे रायसेन सागर जिलों के कई गांव तेंदूखेड़ा बाजार अन्य व्यवस्था में नजदीक है दुर्भाग्य की बात यह है कि पूरे लंबे चौड़े क्षेत्र में वर्ष भर कभी कभार मंडी खुलने से तेंदूखेड़ा का वर्षों से जमा जमाया व्यापार प्रभावित हो रहा है
:- कई वर्षों से सीजन सहित अधिकतर रहती बंद मंडी
तेंदूखेड़ा क्षेत्र में कई वर्षों का रिकॉर्ड या अखबारों के समाचार पर ध्यान दिया जाए तो कई वर्षों से घोष मित्र बंद पड़ा है जब काम यह वहां से सेटिंग संरक्षण में चल रहा है हर वर्ष सीजन के समय मांग उठती रहती है तब कुछ दिनों के लिए खानापूर्ति कर दी जाती है ऐसा चर्चा के दौरान सुना गया कि जबकि यह कृषि प्रधान चित्र है कृषि की अच्छी पैदावार है
:- लाखों खर्च कर बनी मंडी शोभा की सुपारी
लगभग 25 वर्ष पूर्व तात्कालिक शासन ने कृषि क्षेत्र होने तेंदूखेड़ा सहित मां नर्मदा अंचल क्षेत्र के किसानों व्यापारियों की सुविधा हेतु यह कृषि मंडी बनाई थी तात्कालिक कुछ वर्षों तक यह मंडी बेहतर चली किंतु कुछ वर्ष से चर्चा के दौरान सुना गया कि कर्मचारी की मनमर्जी एवं अव्यवस्थाओं की शिकायत पर कार्यवाही नहीं होने मनमानी लापरवाही बढ़ने से मंडी शोभा की सुपारी बन गई है
:- गोदाम की नीलामी अभी तक नहीं पूर्ण कृषि उपज मंडी होने से व्यापारियों के लिए अन्य कृषि उपज मंडी की तरह लगभग 10 गोदाम में बनी है जो अभी तक व्यापारियों के लिए नहीं मिली जन चर्चा है कि नीलामी एवं वितरण की किस प्रक्रिया के तहत यह मामला उलझा है किंतु यह सभी दुकान है अभी खाली हैं व्यापारियों के नाम पर आवंटन नहीं हुई लाखों खर्च के बाद इनका उपयोग नहीं होना दुर्भाग्य की बात है
:- किसानों का विश्राम गए पड़े खाली शासन ने किसानों की सुविधा के लिए विश्राम गृह बनाए हैं किंतु जब कृषि का घोष विक्रय बंद पड़ा है किसान मंडी में नहीं आ रहे हैं तो फिर इनका उपयोग नहीं होने से खाली पड़े हैं खाली पड़े होने से जंजर होने लगे इनमें गंदगी अस्वच्छता देखी जा सकती है ऐसा चर्चा का विषय सुना गया
:- मंडी में घोष विक्रय नहीं फिर रसीद से बाजीगरी क्यों
जन चर्चा के दौरान सोना गया जब कोई भी कृषि उपज मंडी में घोष विक्रय किया जाता है की तो ₹4 प्रति बोरा शुल्क लिया जाता है किंतु जब सीजन सहित कई वर्षों से मंडी बंद फिर यह शुल्क लेकर क्या यह उच्च अधिकारियों को बताया जाता है कि मंडी से क्रय विक्रय हो रहा है या अन्य कारण जो भी जनता के सामने रसीद की कहानी सामने आना चाहिए
:- बिना पक्का बिल प्रतिदिन परिवहन शासन को लग रहा चूना
जन चर्चा के दौरान सुना गया कि मध्य प्रदेश में जहां पूर्ण एवं मंडी है उप मंडी है वह सीजन सहित वर्ष भर चालू रहती है इससे 1.70 ₹ प्रति सैकड़ा मंडी शुल्क वसूला पार्क के रूप में लिया जाता है जब घोष विक्रय कृषि मंडी से होता है तब यह पक्का काम होता है इससे जो शुल्क की रसीद लेकर व्यापारी को दी जाती इससे कहीं भी परिवहन करता है जैसे एक बोरा अनाज ₹5000 का विका तो पचासी रुपए उसे मंडी शुल्क देना होगा 1 ट्रक में औसतन 130 से 140 क्विंटल बनता है इसमें लगभग ₹11000 लगभग ₹12000 का चूना शासन को लग रहा है बताया जाता है कि पिकअप 407 एवं 709 माल वाहन में 30 से लेकर 50 क्विंटल तक का माल जाता है इससे इसी अनुपात में ₹3000 से लेकर ₹5000 की टैक्स की चोरी हो रही है जबकि परिवहन जारी है
:- कच्चे बिल से चल रहा सेटिंग कार्य जब शिकायतें बढ़ी तब जन चर्चा भी तेज हुई इस क्रम मैं सुना गया की यह क्षेत्र कृषि प्रधान होने से अनाज का परिवहन प्रतिदिन कई बोरो का हो रहा है इसमें कम कीमत की कच्ची पर्ची बन कर व्यापारियों का काम चल जाता है जबकि यदि मंडी से घोष विक्रय होता तो पक्के बिल पर मंडी एवं शासन को कई रुपए का टैक्स मिलता व्यापारी कभी पक्का बिल लाकर निश्चित हो जाता किंतु सेटिंग एवं अंडरस्टेटमेंट की चर्चा है जिसमें मंडी एवं शासन को चूना लगाकर विशेष वर्ग को लाभ मिल रहा है
:- सावधान बाजार का अस्तित्व खतरे में
जब लंबे समय से सीजन पर मंडी बंद के संबंध में बाजार पर पड़ने वाले परिणाम पर चर्चा की तब जन चर्चा के दौरान सुना गया कि मंडी से घोष विक्रय होने से लंबे समय से इस क्षेत्र का व्यापार गाडरवारा करेली उदयपुरा पिपरिया आदि बड़ी मंडियों में व्यापार होने लगा जब वह किसान अपनी उपज का माल बेचने तो क्या जैसे अपनी उपज में हीरापुर भामा विल थारी गंगाई मंगवा टेकापार करैया जमानिया केरपानी सिमरिया पड़रिया जैसे कई गांव के व्यक्ति जो पहले तेंदूखेड़ा में अनाज बेचते थे अतः बाहर अनाज बेच रहे तो क्या वहां से वापस तेंदूखेड़ा सामान कपड़ा बिजली लोहा किराना मेडिकल पुस्तकें विद्युत गृह निर्माण क इलेक्ट्रिकल्स आदि का सामान लेते आएंगे किसानों से तेंदूखेड़ा का अधिक बाजार चलता है ऐसे जन चर्चा है कि तेंदूखेड़ा व्यापार में तेजी के साथ आ रहा है
:- पूर्व में सचिव सहित कर्मचारियों पर गिरीराज
पूर्व समय में चैनलों सहित अन्य अखबारों मंडी की अ व्यवस्था के खिलाफ समाचार प्रकाशित किए तब तात्कालिक जिला एवं अनुविभागीय अधिकारी ने औचक निरिक्षण कर रिकार्ड तक जप्त कर लिया सचिव सहित कई कर्मचारियों के निलंबित की भी चर्चा है क्योंकि सचिव सेवानिवृत्ति के कगार पर थे एक कारण अधिकारियों ने मानवता पर छोड़ दिया बाकी का गा जो मैं दवा गया
:- वर्षों में से वर्षों से डर कर्मचारी सचिव रहते नादान
जब मंडी की लापरवाही की कहानी आगे बढ़ी तब जन चर्चा से कई तथ्य सामने आय इसमें सोना गया कि शायद शासन का नियम एवं व व्यावहारिक पक्ष भी रहता है अधिक समय तक कोई भी कर्मचारी लंबे समय बाद बदल जाते हैं ताकि एकाधिकार न रहे चर्चा है जहां कहीं कर्मचारी संरक्षण सेटिंग से विभाग को खुश कर लंबे समय से डटे हैं पूरी गतिविधि क्रिया कलाप से परिचित सचिव जब तक बदलते रहते हैं तब तक चाचा के अनुसार और जिम्मेदारी अधिकारी अधिकतर यहां नहीं रहते भले ही कब्जी रिकॉर्ड कुछ भी दर्शाएं अब तक एडजस्ट कर चले जाते हैं जिससे बारी कर्मचारी जो यहां ल** इस समय से हैं मंडी का संचालन कर रहे हैं यदि क्षेत्रीय कर्मचारी जिम्मेदारी पर पाद पर रहते तो वह किसान एवं बिगड़ते बाजार की पीरा को समझकर सुधर करता
:- बिना लाइसेंस भाटियों के यहां से परिवहन हो मान
शिकायतों चर्चाओं के बीच जानकारी लगी है एवं चर्चा है कि मंडी में घुस वितरण बंद होने से आखिर किसान
मजबूरी वश कहीं तो अनाज बेचेगा लाइसेंस व्यापारी तो ठीक किंतु चर्चा है कि आस-पास की बिना लाइसेंस घाटी व्यापारियों के यहां भी धड़ल्ले से मिली भगत से कच्चे माल पर परिवहन हो रहा है काश इनका भी लाइसेंस बन जाता तो ठीक रहता ।
इनका कहना है
इस संबंध में आवश्यक जांच कराकर मंडी में आवश्यक कार्रवाई कराऊंगा ।
, ,,,,,,,,,, सी एल डेहरिया एस डी एम अधिकारी भारसाधक अधिकारी मंडी तेंदूखेड़ा
में एक या दो दिन में आता हूं फिर चर्चा करूंगा l
,, ,,,,,,,,,,हरिदास इरपाची मंडी सचिव तेंदूखेड़ा
उपज मंडी में विक्रय नहीं होने से किसानों को परेशानी होती है सही रेट पर माल बिकिनी में परेशानी होती है ।। ,,,,,,,,,,,,,,,, किसान बंधु तेंदूखेड़ा
जब सीजन सहित वर्ष भर कई बार मंडी बंद रहती है परिणाम स्वरुप किसान बाहर की मंडियों में अनाज बेचे अपने से आवश्यक वस्तु को वही से ले आता है इससे तेंदूखेड़ा व्यापार प्रभावित हो जाता है
,,,,,,,,,,,,, नगरीय प्रतिष्ठान व्यापारी
तेंदूखेड़ा का गौरव कृषि मंडी है यहां पर किसानों व्यापारियों की सुविधा के लिए लाखों रुपए खर्च कर यह बनाया था जब मंडी बंद रहती तो किसानों की आवाज ही नहीं होने से मजबूर मजदूरों को काम निकालना बंद है


