ये लड़ाई लम्बी है.. मैं इसे लड़ता रहूंगा..बस ज़रूरत है..आपके साथ की : कलम का सिपाही
कोरोना की लहर का कहर...परिवार और पत्रकार


इन्दौर के पत्रकार पलाश राठौर की कलम से….
शायद हम पत्रकारों कि क़ौम ही ऐसी होती है..तभी तो हम इस भयावहता के दौर में भी सवालों के साथ हर मोड़ पर खड़े है..हमारी किताब में वर्क फ्रॉम होम शब्द नही होता है.. क्या हमें अपने परिवार के साथ समय बिताने का अधिकार नही है..?हमारे भी माँ बाप ओर बच्चों का कलेजा मुह को आ जाता है जब हम घर से बाहर कदम रखते है ..लेकिन हमें अपनी जिम्मेदारियों का एहसास है.. हमें पता है यदि हम बाहर नहीं निकले तो आप तक सही और सटीक खबरें नही पहुंचेगी..और तो और सच ओर झूठ के बीच का फासला आपको कौन बताएगा ? हमें पता है यदि हम अपने परिवार ओर बच्चों की बात मान लेंगे तो शायद हम हमारी जिम्मेदारियों का निर्वाह नहीं कर पाएंगे । हमें मालूम है यह सब करने के बाद हमें गोदी मीडिया,चाटुकार जैसे अपमानजनक शब्दों का सामना भी करना पढ़ेगा..हाँ आज कल हमें कोरोना काल में कोई क़लमकार कह कर नही पुकारता..यहां तक कि अब तो कुछ रसूखदार सकारात्मक विचार के लिए खबरों से दूर रहने के लिए भी सलाह दे रहे है..लेकिन यदि आप सच देखेंगे नही तो लड़ेंगे कैसे ? सच्चाई से मुंह फेरना आसान होता है..लेकिन सब जानकर भी चुप रहना ये हमारी किताब का हिस्सा नही है । हम वही दिखाते हैं जो समाज में घटित हो रहा है। हमें शौक नहीं अपनी जान पर खेलकर जलती चिताओं और कब्रिस्तान की खबरें बना कर डराने का, हमें शौक नहीं, ऑक्सीजन की किल्लत दिखा कर अवाम में कोरोना का भय बनाने का, हमें शौक नहीं जीवन रक्षक दवाइयों की कालाबाजारी दिखाने का, हमें सच शोक नही साहब देश कि दुर्गति दिखाने का..अस्पतालों में बिस्तरों कि कमी होने पर हकीकत का आईना दिखाने का…हमें अच्छा लगता है जब घरों में ही रहकर उपचार करने के लिए डॉक्टरों, विशेषज्ञों से आपके लिए सलाह लेकर हम अपनी कलम का उपयोग करते है.. हमें बहुत तकलीफ होती है.. जब संक्रमित व्यक्ति के परिजनों से मिलकर उनका दर्द जान लेते है। अब तो इस विकट परिस्थितियों को लिखते हुए हमारी कलाम भी रो पढ़ती है..लेकिन हम सिर्फ यह बताना चाहते हैं कि यह हाल आपके भी हो सकते है । इसलिए जागना जरूरी है..सवाल करना जरूरी है, हमने भी इस भूखे काल के गाल में कई साथियों को खो दिया है..लेकिन हम डरकर, सच दिखाना नही छोड़ सकते । ये लड़ाई लम्बी है.. मैं इसे लड़ता रहूंगा..बस ज़रूरत है..आपके साथ कि…
—————————


