इन्दौर।देश भर में कोरोना की दूसरी लहर ने मचा रखा है कोहराम, हाल इन्दौर के भी है बेकाबू
विश्व वैश्विक वापी महामारी कोरोना की दूसरी लहर, लोगो के लिए घातक हो रही है साबित।

इन्दौर से पत्रकार जीतेंद्र चौहान की कलम से…
देश भर में कोरोना की दूसरी लहर ने मचा रखा है कोहराम, हाल इन्दौर के भी है बेकाबू
विश्व वैश्विक वापी महामारी कोरोना की दूसरी लहर, लोगो के लिए घातक हो रही है साबित।
देवी अहिल्या होलकर की नगरी में अभी नही बने ऐसे हालात,,
अस्पतालो में मरीजो के लिए न बेड न ऑक्सीजन ओर नही जीवन रक्षक इंजेक्शन दवाई उपलब्ध हो पा रही है।
भाजपा और कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों ने अस्पताल में भर्ती मरीजो के परिजनों के लिए की खाने की व्यवस्था।
देश भर में कोरोना की दूसरी लहर ने कोहराम मचा रखा है,,,प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले शहर इंदौर में भी कोरोना के चलते हालात असामान्य हो रहे है कही मरीजो को अस्पतालो में बेड पलंग नही मिल रहे है तो कई मरीजो को जीवन रक्षक इंजेक्शन ओर ऑक्सीजन के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है,,,डर ऐसा की अपने मरीज की एक एक सांस बचने के लिए परिजन ऑक्सीजन सिलेंडरों के लिए घंटो धूप में खड़े हो रहे है,,,,इसके बाद भी मन मे भय रहता है कि समय पर मरीज को ऑक्सीजन पहुचा पाएंगे या नही,,,
अस्पतालो में बेड के इंतजार में कई मरीजो ने अस्पताल के गेट पर भी दम तोड़ दिए है,,,,कैसा भयानक नजारा देखने को मिल रहा है माँ अहिल्याबाई की नगरी में एक ओर जहां इंदौर के मुक्तिधाम में शव दहन के लिए जगह नही बची,,,हाय ये कोरोना,,,,,
प्रदेश के मुख्य शिवराज सिंह चौहान द्वारा इस बढ़ते कोरोना की चेन तोड़ने के लिए 30 अप्रैल तक जनता कर्फ़्यू लगाया गया था लेकिन शहर में कोरोना की संख्या पर कमी को लेकर एक बार फिर समय बढ़ा दिया,,,,जिला प्रशासन, डॉक्टर पैरामेडिकल स्टाफ पुलिस प्रशासन,नगर निगम की टीम लगातार अपनी जान जोखिम में डाल कर इस महामारी से जंग लड़ रहे है,,,,, वही अपनी जान जोखिम में डाल कर मीडिया के साथी भी इस कोरोना महामारी में अपनी उपयोगिता दे रहे है, ये लोग कवरेज के के लिए ऐसी जगह जाते है जहां कोरोना के मरीज इलाजरत या सेंपलिंग कराने जाते हैं इस दौरान खुद की चिंता को भुला केवल अपने पत्रकारिता धर्म को निभा रहे,,,,,,,
लेकिन देश के चौथे स्तम्भ मीडिया के लिए शासन द्वारा अभी तक कोई सुविधा मुहैया नही मिल पा रही है आपको बता दे अपना इंदौर के कई वरिष्ठ पत्रकार इलाज के अभाव में जीवन लीला समाप्त करने पर विवश होना पड़ा,,,,, पत्रकारिता का धर्म निभाते हुए प्रदेश भर में अभी तक कई पत्रकार असमय काल के गाल में समा गए है,,,,पीछे छोड़ गए बस परिवार और यादे,,,,,,,,
माँ अहिल्या की नगरी इंदौर अपनी सेवा और सहयोग के लिए जाना जाता है,,,देश मे कोरोना संक्रमण के चलते लगे लॉक डाउन जनता कर्फ़्यू के कारण मजदूरो का पलायन करने को मजबूर हुवे जिसमे महिलाएं और छोटे छोटे बच्चे भी शामिल थे कई किलोमीटर पैदल यात्राकर इंदौर के बाय पास से गुजर रहे थे,,, इंदौर के बाय पास पर दिल दहला देने वाले दृश्य आज भी आखो से आंसू निकल देते है,,,लेकिन इंदौर की जनता का ओर सामाजिक संस्थओं द्वारा पैदल पलायन करने वालो को दिल खोलकर मदद पहुचने का जज्बा भी काबिले तारीफ था…



