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इन्दौर के गीताभवन अस्पताल में डेढ़ करोड़ की लागत वाला ऑक्सीजन प्लांट एक पखवाड़े में शुरु हो जाएगा

हर दिन 200 सिलेंडर मिलने लगेगे,गंभीर मरीजों के लिए 44 आईसीयू बेड भी उपलब्ध हो जाएंगे

 

इंदौर से सतीश शर्मा की रिर्पोट

इंदौर ।इंदौर के गीताभवन अस्पताल में करीब 1.50 करोड़ रुपये की लागत वाला एयरबेस ऑक्सीजन प्लांट एक पखवाड़े में शुरु हो जाएगा। इस प्लांट से प्रतिदिन 200 सिलेंडर ऑक्सीजन मिलने लगेगी। इस प्लॉंट के शुरु होने पर इस अस्पताल में गंभीर मरीजों के उपचार के लिए 44 आईसीयू बेड भी उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
भाजपा की कोर कमेटी की पहल पर गीताभवन अस्पताल को आईसीयू वाले मरीजों के लिए रखने संबंधी जानकारी देते हुए नगर भाजपा अध्यक्ष गौरव रणदिवे ने बताया कि शहर के अन्य प्रमुख-बड़े अस्पताल भी टी चोईथराम हॉस्पिटल की तरह अपना खुद का ऑक्सीजन प्लांट अति शीघ्र स्थापित करें, इस संबंध में सांसद शंकर लालवानी, प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट और स्वयं रणदिवे बॉम्इबे हॉस्पिटल, अरबिंदो, मेदांता, सुपर स्पेशलिटी, विशेष जूपिटर आदि अस्पतालों के संचालकों के साथ बैठक करेंगे, साथ ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी अनुरोध करेंगे कि शहर के अधिकांश अस्पताल स्वयं के प्लॉंट लगा सकें। इसके लिए इनके सबसिडी और लोन संबंधी प्रकरणों का त्वरित निराकरण किया जाए। चोईथराम अस्पताल अपनी जरूरत का 70 फीसदी ऑक्सीजन खुद के प्लांट से प्राप्त कर रहा है, बाकी अस्पताल में भी प्लॉंट शुरु होने पर आईसीयू पेशेंट को राहत मिलेगी, अभी जो गंभीर मरीज दाखिल हैं उन्हें हाय फ्लो ऑक्सीजन लग रहा है। जिन मरीजों की मौत हो रही है उनमें ज्यादातर 45 से अधिक उम्र के हैं। ऐसे में लोगों में यह जागरुकता भी जरूरी है कि आगामी समय से शुरु हो रहे टीकाकरण में तत्परता दिखाएं और बाकी लोगों को भी प्रेरित करें। पहले मुस्लिमबहुल आबादी में टीका लगाने को लेकर जो गलतफहमी थी वह मौत के बढ़ते आंकड़ों से दूर हुई है, समाज को समझ आ चुका है कि कोरोना हिंदू-मुस्लेलिम में भेद नहीं कर रहा है।

नए अस्पताल की अनुमति में ऑक्सीजन प्लांट अनिवार्य करने पर मुख्यमंत्री से चर्चा की

शहर के अस्पतालों में व्याप्त ऑक्सीजन संकट के चलते अब भविष्य में सरकार जिन भी अस्पतालों को मंजूरी देगी , उसमें ऑक्सीजन प्लांट लगाना अनिवार्य करने संबंधी चर्चा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से नगर भाजपा अध्यक्ष गौरव रणदिवे ने की है। रणदिवे का कहना था इस घातक महामारी का शिकार गंभीर मरीजों को आज जिस संकट से जूझना पड़ रहा है उसमें अधिकांश अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट नहीं होना बड़ा मुद्दा है

कोरोना रिलीफ लाइव

नगर अध्यक्ष कार्यालय को ही कंट्रोल रूम बना कर फोन पर ही समस्या दूर कर रहे तो चिलचिलाती धूप में विधायक बांट रहे भोजन पैकेट

विधानसभा क्षेत्र अनुसार अस्पतालों की सूची
बनाकर मरीजों को भर्ती कराया जा रहा है।

ऑक्सीजन, इंजेक्शन की मांग करने वालों को दोनों ही संतुष्ट नहीं कर पा रहे

कोरोना महामारी से निपटने के लिए सभी जन प्रतिनिधि और दल अपनी हैसियत मुताबिक काम कर रहे हैं। इन्दौर नगर भाजपा ने शहर के सातों विधानसभा क्षेत्रों के एस्पतालों की सूची बना रखी है और उस क्षेत्र के मरीजों को वहीं दाखिल कराया जा रहा है।कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला प्रशासन के असहयोगात्मक रवैये से नाराज जरूर हैं, लेकिन उन्हें भी मरीजों की उतनी ही चिंता है, अब उन्होंने सरकारी अस्पतालों में दाखिल मरीजों के परिजनों को भोजन वितरण का अभियान चला रखा है।
जावरा कंपाउंड स्थित भाजपा कार्यालय एक तरह से कंट्रोल रूम बन गया है। एक दो नहीं पांच मोबाइलों की घंटी रह रहकर बजती रहती है जहा कभी नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे अस्पतालों की सूची उठाते हैं तो कभी मंडल अध्यक्षों की वर्चुअल बैठक का समन्वय भी करते रहते हैं। इस बीच सांसद-प्रभारी मंत्री का फोन आ जाए तो बैठक में शामिल होकर पुन: यहीं आ जाते हैं।
शहर के सातों विधानसभा (महू में उषा ठाकुर मोर्मेंचा संभाले हुए हैं) में किस क्षेत्र में कितने अस्पताल हैं, इनमें कितने सामान्य हैं, कितने में आईसीयू वार्ड हैं, कितनों में ऑक्सीजन की सुविधा नहीं है, इन अस्पतालों को ए, बी, सी,डी श्रेणी में बांट रखा है। जिन क्षेत्र से मरीज को अस्पताल में बेड नहीं मिलने की सूचना कार्यकर्ता से मिलती है, वो मरीज का ऑक्सीजन लेबल, सीटी स्केन रिपोर्ट आदि की जानकारी लेते हैं और उस विधानसभा क्षेत्र के आवश्यक सुविधा वाले अस्पताल को सूचित करते हैं और उनके फोन पर ज्यादातर को बेड मिल भी जाता है। इस बीच ऑक्सीजन सिलेंडर या रेमडिसिविर की आवश्यकता वाले फोन आने पर वे भी असमर्थता व्यक्त कर देते हैं।
इंजेक्शन के संकट को लेकर यह कहना भी नहीं भूलते कि इंदौर के डॉक्टरों ने लिख लिख कर इंजेक्शन को हौवा बना दिया है।
कोरोना का कहर सब जगह है लेकिन मुंबई, दिल्ली आदि में भी यहां जैसी डिमांड नहीं देखी।

कोरोना के बीच विधायक संजय शुक्ला विपक्ष में कमान सम्हाले हुए, कर रहे शहर की सेवा

अब बात करें कांग्रेस की तो शहर अध्यक्ष विनय बाकलीवाल को जितनी बार फोन लगाया, स्विच्ड ऑफ का ही संदेश बजता रहा।विपक्ष में अभी विधायक संजय शुक्ला ही किला लड़ा रहे हैं।यशवंत प्लॉजा स्थित उनके ऑफिस के बाहर मदद के लिए इंतजार कर रहे मरीजों के परिजनों की भीड़ लगी थी।विधायक संजय शुक्ला पहुंचे तो उनका स्टॉफ भी सक्रिय हो गया।उनके मीडिया एडवाइजर सुनील अग्रवाल ने डॉक्टर की सलाह याद दिलाई तो एक अन्य सहयोगी को कैंची लाने को और कलाई पर बंधे मंदिरों के पचरंगी डोरे काटने को कहा, कहने लगे भैया डॉक्टर ने समझाया था कोरोना वॉयरस इन डोरों पर चिपक सकता है। बातचीत चली रही थी कि एक अन्य सहयोगी ने कहा भैया भोजन पैकेट वाली गाड़ी आ गई है।
वो बताने लगे सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को तो अस्पताल से खाना मिल जाता है लेकिन उनके परिजन भूखे प्यासे बाहर बैठे रहते हैं। होटल-ढाबे खुल नहीं रहे तो मैंने तय किया है उन सब को भोजन तो मिल ही जाए। अभी सुपर स्पेशलिटी जाऊंगा, फिर बाकी सरकारी अस्पतालों पर ऑक्सीजन सिलेंडर, रेमडिसिविर इंजेक्शन की मदद नहीं कर पाने का अफसोस है। मैं तो आज भी पांच हजार इंजेक्शन खरीद सकता हूं, प्रशासन सुनता ही नहीं। वो यह कहने से भी नहीं चूकते कि भाजपा विधायकों को थोक में इंजेक्शन दिए जा रहे हैं, हम भी विधायक हैं लेकिन जिला प्रशासन सुनता ही नहीं। इसी बीच फोन बजता है, विधायक विशाल पटेल से कहते हैं अपने से जितना बन रहा है सबके लिए कर रहे हैं, लोगों को भी समझ आ रहा है हमारे साथ कैसा भेदभाव कर रहे हैं।
बातचीत खत्म होते ही विधायक शुक्ला पूर्व महाधिवक्ता आनंद मोहन माथुर का भी आभार मानने हुए कहते हैं प्रशासन से हमतो लंबे समय से सेवाकुंज हॉस्पिटल शुरु करने की मांग कर रहे थे, माथुर साब ने पिटिशन लगाई तो हाईकोर्ट के निर्देश पर अब प्रशासन को सेवाकुंज शुरु करना पड़ रहा है। मैं तो अपना 200 बेड वाला होस्टल भी प्रशासन को देने को तैयार हूं, मरीजों की जान बचाने में भी प्रशासन कांग्रेस-भाजपा वाली मानसिकता से काम कर रहा है।

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