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गोटेगांव में कोरोना सेबिगड रहे हालात| अस्पताल मे कई कर्मचारी नही निभा रहे जिम्मेदारी|

गोटेगांव संवाददाता सीताराम रजक

गोटेगांव में कोरोना के हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं |
वायरल का विकराल रूप दिखने लगा है| लेकिन विकट परिस्थितियों मे भी गोटेगांव के सरकारी अस्पताल में कुछ कर्मचारी अपनी डयूटी न करके जिम्मेदारी से भाग रहे है|
अस्पताल में दस बेड का कोविड उपचार सेंटर प्रारंभ किया गया|
लेकिन अब एक बड़ी समस्या यह आ रही है कि डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के चलते इस वार्ड का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है|
हालात यह है कि गम्भीर मरीजों की उखडती सासों को संजीवनी रूपी आक्सीजन देने के लिए अस्पताल बीएमओ डा. एस.एस. धुर्वे ने कुछ कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई लेकिन ये ड्यूटी करने से बच रहे हैं|

इसलिए कोरोना पाजिटिव मरीजों को यहाँ भर्ती नहीं किया जा रहा है|
अब ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि अस्पताल में बेड है, आक्सीजन है, सीमित संसाधन भी है तो कुछ कर्मचारियों की मनमर्ज़ी नाफरमानी से अब तक कई ऐसे लोग मर चुके है जिन्हें यदि समय पर यहीं इलाज मिल जाता तो उनकी सासें नही उखडती|
अभी भी चिंता जाहिर करने या सलाह देने का समय नही, बल्कि ठोस कदम उठाने का है| फिर चाहे शासन,प्रशसन को समय पर पैरामेडिकल कर्मचारी नियुक्ति हो, सतत टीकाकरण हो, या निरंतर कोरोना जांच किट की उपलब्धता हो| निश्चित ही यदि मानवता के साथ काम किया जाए तो कोरोना पर हमारी जीत निश्चित है| कई जानें बचाई जा सकती हैं बस आवश्यकता है तो दृढ़ इच्छाशक्ति की|

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