मध्यप्रदेश

विदिशा।जल संकट से जूझते ग्रामीण – ग्रामीण क्षेत्रों में गहराया जल संकट

बूंद बूंद पानी को तरसते गांव के बाशिंदे 2 किलोमीटर दूर से ढोकर लाना पड़ता है पानी - अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को कई बार लगा चुके हैं गुहार, कोई सुनवाई नहीं

By Rohit Kumar ojha

विदिशा से नितीश श्रीवास्तव की रिपोर्ट

 

विदिशा।जल संकट से जूझते ग्रामीण – ग्रामीण क्षेत्रों में गहराया जल संकट

बूंद बूंद पानी को तरसते गांव के बाशिंदे 2 किलोमीटर दूर से ढोकर लाना पड़ता है पानी – अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को कई बार लगा चुके हैं गुहार, कोई सुनवाई नहीं

जिले की गंजबासौदा तहसील के गांव भडेरू में पानी की भारी किल्लत के चलते ग्रामीण बूंद बूंद के लिए तरस रहे हैं, ग्रामीण 2 किलोमीटर दूर एक खेत में गड्ढे से रिसाव हो रहे गंदे पानी को ढोकर लाते है और अपनी प्यास बुझा रहे हैं, भडेरू गांव की जनता अभी भी बुनियादी सुविधा से कोसों दूर है गांव में दो बोर करवाये गये थे लेकिन उन गड्ढों में से पानी नहीं निकला गांव में नल जल योजना भी नहीं है।गौरतलब है कि ग्रामीण पानी की किल्लत से पिछले कई सालों से जूझ रहे हैं । ग्राम वासियों में सरपंच सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और अधिकारियों को कई बार आवेदन निवेदन व उनसे गुहार लगा चुके हैं कि क्षेत्र में पानी की भारी कमी है और गर्मियों में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है बावजूद इसके आज तक उनकी इस समस्या का हल नहीं निकला ग्रामीणों ने बताया कि पानी के लिए कई घंटों की जद्दोजहद करनी पड़ती है सुबह परिवार सहित जल्दी उठना और 2 किलोमीटर दूर एक खेत में एक गड्ढे में भरे पानी को हम भर लेते हैं जोकि गंदा है लेकिन मजबूरन हमें और हमारे परिवार को इसी पानी से अपनी प्यास बुझानी पड़ती है।गांव के लोगों का कहना है कि पानी की किल्लत कई सालों से बनी हुई है पानी की समस्या के लिए हमने पूर्व विधायक से लेकर वर्तमान विधायक और आला अधिकारियों के चक्कर लगाए लेकिन किसी ने भी हमारी समस्या पर गौर नहीं किया इतना ही नहीं भडेरू गांव में आने की जहमत तक नहीं उठाई जिससे गांव के लोग अब भी शुद्ध पानी के लिए मशक्कत कर रहे हैं वही पंचायत सचिव का कहना है कि पानी की किल्लत गांव में बनी हुई है इस बात की जानकारी हमने वरिष्ठ अधिकारियों को पहले ही दे चुके हैं। दो बोरवेल के गड्ढे खुदवाये गए थे जो जमीनी स्तर पर पानी की कमी के चलते फेल हो गए हैं। फिलहाल ग्राम वासियों की समस्या विगत कई वर्षों से जस की तस है ऐसा लगता है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों को उनके अपने हाल पर छोड़ दिया है।

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