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जुन्नारदेव – ब्रह्म सभा ने भुजलिया मिलन समारोह मनाया

जुन्नारदेव के द्धारा भुजरिया मिलन का यह पारंपरिक त्यौहार स्थानीय  रामलीला मंच, विजय स्तंभ पर मनाया गया

ज्ञानेश्वर विश्वकर्मा की रिपोर्ट

ब्रह्म सभा ने भुजलिया मिलन समारोह मनाया

भारतीय संस्कृति और पुरातन सभ्यता की प्रतीक कजलियां पर्व की महान परंपरा का गौरवशाली क्षण एक बार फिर हमारे समक्ष आया है। भुजरिया का यह पावन पर्व की परंपरा को हम सब सामूहिक रूप से मना रहे हैं। इस हेतु  ब्रह्म सभा, जुन्नारदेव के द्धारा भुजरिया मिलन का यह पारंपरिक त्यौहार स्थानीय  रामलीला मंच, विजय स्तंभ पर मनाया गया। जिसमें नगर के विद्वान पंडित मनु महाराज, प्रितम महाराज वृन्दावन दूबे ने कार्यक्रम मे उदभोदन देकर भुजलिया पर्व के वैज्ञानिक महत्व, पर प्रकाश डाला जिसमें रबी की फसल कुछ समय के बाद बोई जानी है। हमारे खेती प्रधान देश मे गेंहू की बुआई करने के पूर्व किसान भाई और खेती से जुड़े सभी लोग अपने अपने घरों में गेहूं के कुछ दानों को पत्तों के बने दोनों(पत्तों से बने गंजी नुमा पात्र) में बोते है तथा कुछ दिवस तक उनकी देख रेख करते हुए उन्हें अंकुरित होने देते है। आज के दिन इन भुजलियों को पहले घर के बाहर रखा जाता है, ताकि साथी किसान इस को देखकर घर मे रखी फसल के निश्चित दिनों में होने वाले अंकुरण को और उन पौधों के बड़े होने की रफ्तार को चैक कर सकें , तथा अपने हाथों में रखकर अपने पडौसी और अन्य लोगों को अंकुरण दिखाते थे।जो बीज अंकुरित नही होते है अगली फसल में उन्हें बोया नही जाता है तथा जिन किसानों के घर का अंकुरण अच्छा हुआ है उनसे आगामी  फसल में अच्छे बीज बोने के लिए मांग लिए जाते थे, घर के बाहर शंकु आकार के दोनों में लगाई गई बीज की अंकुरण प्रदर्शन( दाढ़ी) कई दिनों तक आगन्तुक लोगों को उस घर के बीजों के अंकुरण की जानकारी देता है। बीज अंकुरित होंगे या नही इस बात की सैम्पलिंग का बुजुर्गों द्धारा अपनाया जाने वाला भुजलिया अर्थात भुज (हाथों) से लिया और दिया जाना वाला अंकुरित बीजों का आदान प्रदान एक वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित पर्व है। हिन्दू संस्कृति के त्यौहार को लेकर एक दूसरे को बधाई दी। यह भुजलिया मिलन समारोह कोरोना महामारी के वजह से पिछले साल नही हो पाया। कोरोना काल मे इस संसार को छोड़कर चले गए ईश्वर दिवंगत आत्मा को स्वर्ण मे जगह देने के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर ब्रह्म समाज अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा पं, विष्णु प्रसाद शर्मा, गजेंद्र मालवी, सीपी शर्मा,अभिषेक महाराज, कैलाश चौरसिया, सुरेश भोला सोनी, तरुण उपाध्याय, विषेश चौरसिया, दीपेश जैन, शालिग्राम अग्रवाल, नानेद्र शर्मा, संतोष बडोनिया उपस्थित रहे । इस कार्यक्रम मे संचालन रवि चतुर्वेदी का विशेष योगदान रहा

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