मध्यप्रदेश

दो साल बाद भी अधूरा पड़ा स्टाप डेम, राशि निकाल कर हड़प गए सरपंच-सचिव स्टाप डेम के नाम पर पानी में बहा दिए लाखों रूपए

सिलवानी से आशीष सैनी की रिपोर्ट

सिलवानी। क्षेत्र में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए काफी संख्या में स्टाप डेम का निर्माण मनरेगा योजना से किया गया था। लेकिन ये डेम सिंचाई के लिए पूरी तरह अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। इनमें पानी ही नहीं है। इनके निर्माण में पूरी तरह मापदंडों की अनदेखी की गई और केवल फंड की बंदरबांट में अधिकारी व निर्माण एजेंसियां लिप्त रही। ग्राम पंचायत बम्होरी वर्धा के रिमझा नाले पर दो साल पहले मनरेगा योजना से 11 लाख 69 हजार की लागत से एक स्टाप डेम बनाया गया था। स्टाप डेम के लिए शासन से स्वीकृत 11 लाख 69 हजार रुपये में से 10 लाख 44 हजार 332 रुपये की राशि निकाल ली गई, जबकि इसका निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका। लाखों की राशि खर्च करने के बाद यह स्टाप डेम किसानों के काम नहीं आ रहा।
ग्राम पंचायत बम्होरी वर्धा के रिमझा नाले में करीब 11 लाख 69 हजार की लागत से मनरेगा योजना से विभागीय उपयंत्री रामलाल मंडरई की देखरेख में काम करवाया गया था। डेम में फाटक लगाए जाने थे लेकिन आज तक एक भी फाटक नहीं लगाया गया है, जिससे वर्षा का जल रोक कर किसानों को सिंचाई की सुविधा नहीं मिल पाती। रिमझा नाले पर 2019 में स्टाप डेम बनाया गया। उपयंत्री रामलाल मंडरई को इसकी जवाबदारी सौंपी गई थी। इसमें फाटक नहीं लगाए गए, जिससे वर्षा का जल नहीं रोका जा सकता। कुल मिलाकर किसानों की सुविधा के लिए बनाए गए स्टाप डेम का कार्य अधूरा होने एवं फाटक नहीं लगाए जाने से बारिश का पानी बह जाता है और इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है।

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