पन्ना जिले की राजनीति इन दिनों गरमा गई है, वजह है हथकुरी पंचायत के तिवारी पिपरिया की दलित बस्ती — जहां कीचड़ भरे 3 किलोमीटर रास्ते ने बच्चों की पढ़ाई, मरीज़ों की ज़िंदगी और पूरे समाज की साँसे थाम रखी हैं।पवई विधानसभा के तेज तर्रार वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पूर्व जिला पंचायत सदस्य अनिल तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया की, यह कोई एक दिन की पीड़ा नहीं, बल्कि सालों से झेली जा रही एक बदहाल हकीकत है। लेकिन अब यह मामला दिल्ली तक पहुंच चुका है, क्योंकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राज्यसभा सांसद श्री दिग्विजय सिंह ने इसे बहुत गंभीरता से लिया है।
जयवर्धन सिंह उठाएंगे ये मुद्दा विधानसभा में……
जयवर्धन सिंह उठाएंगे ये मुद्दा विधानसभा में
श्री सिंह ने इस दर्दनाक हालात की जानकारी मिलने पर अपने बेटे एवं विधायक जयवर्धन सिंह से कहा है कि इस मुद्दे को वह विधानसभा में पूरे जोर-शोर से उठाएं। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है —
“अगर शासन नहीं सुनता, तो मैं खुद इन दलित-आदिवासी भाइयों के हक के लिए सड़क पर उतरूंगा”
काग्रेस नेता तिवारी ने आगे बताया कि ..
ये दर्द नया नहीं है…
ठीक एक साल पहले पड़ोस की पटोरी ग्राम पंचायत में ऐसी ही स्थिति में दूषित पानी और इलाज के अभाव में आदिवासी बस्ती के कई मासूम बच्चों की मौत हो गई थी सत्ता के नेता दूर से तमाशा देखते रहे, लेकिन सिर्फ में कांग्रेस का सिपाही पहुंचा था और आदिवासी परिवारों को हरसंभव मदद दी,
बच्चों के तेरहवीं संस्कार के लिए अनाज, राशन और सामूहिक सहायता का प्रबंध किया और गांव-गांव जाकर प्रशासन की नींद तोड़ने की कोशिश की। लेकिन दुख की बात ये है कि तब भी कोई सत्ता पक्ष का नेता झांकने तक नहीं आया।
इसी तरह अब हथकुरी पंचायत की दलित बस्ती में फिर वही कहानी दोहराई जा रही है…रास्ता नहीं है बीमार कंधे पर ढोए जा रहे हैं।बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे। गर्भवती महिलाएं फंसी हैं।
अब लड़ाई का बिगुल बज चुका है…
अनिल तिवारी ने इस बार फिर अलग-अलग बस्तियों की तस्वीरें और समस्याएं लेकर दिग्विजय सिंह को सौंप दी हैं।
अब पूरा मामला राजनीतिक गरमी में तब्दील हो चुका है।
जनता सवाल पूछ रही है:
सत्ता में बैठे नेता अब तक क्यों चुप हैं?
क्या आदिवासी और दलितों की बस्तियां इंसान नहीं?
क्या सिर्फ चुनाव में वोट लेने के लिए ही इनकी याद आती है?