भानपुरा-सावन माह में विशेष…. प्रकृति का वरदान है भानपुरा के बड़े महादेव…. प्राकृतिक सौंदर्य से पूरी तरह से परिपूर्ण स्थान बड़ा महादेव….

दीपक रुद्रवाल की रिपोर्ट
सावन माह में विशेष….
प्रकृति का वरदान है भानपुरा के बड़े महादेव….
प्राकृतिक सौंदर्य से पूरी तरह से परिपूर्ण स्थान बड़ा महादेव….
भानपुरा नि.प्र. मन्दसौर जिले की भानपुरा तहसील मुख्यालय भानपुरा से मात्र दो किलोमीटर दूर उत्तर में सीमेंट कंक्रीट रोड से जुड़ा पावन स्थल विश्व के प्राचीनतम कला साक्षो को अपने अंक में समेटे विंध्यन श्रेणी की हरित उपत्यका में झर झर झरते, झरनों के संगीत व लगभग 150 फिट की ऊंचाई से गिरते मौसमी वर्षाकालीन प्रपात के उद्दाम शोर की जीवंतता से आकृष्ट होकर हजारों पर्यटक व श्रद्धालुजन इन दिनों भानपुरा की ओर उन्मुख है।खिंचे चले आरहे है इस नैसर्गिक आनन्द को पाने के लिए। वैसे सावन का महीना गंगाधर शिव की उपासना ओर उनसे वर प्राप्ति का महीना होता है।जब सन्तप्त मानव मन शीतलता पाने की चाह में प्रकृति के इस वरदानी सौंदर्य को अपने अंक में समेट लेना चाहता है तो वह आजाता है बड़े महादेव की शरण मे। यहा प्रतिष्ठित दिव्य शिव लिंग हजारों वर्ष प्राचीन है। इस पर बारहों माह प्रकृति देवी स्वयम अभिषेक करती है। बहुत झुलसाने वाली गर्मी में भी जलधार शिव जी का अभिषेक करती है। सामने ही जल कुंड है जिसकी गहराई इतनी भर है कि यहा तैरने व नहाने से बच्चो का मन कभी नही भरत बच्चो की किलकारियां प्रपात के शोर में विलीन होकर नैसर्गिक सौंदर्य को बढ़ा देती है। पास के वन में उमर यानी जंगल कदम्ब ,बिल्व ,बकुल के फूलों की सुगंध शिवजी के दरबार को महका देती है। पास में ही कई लाख साल पुरानी ज्वालामुखी हलचल से बनी पतासी घाटी है जो मूल्यवान पथरो की सूचना देती थी।पहाड़ी पर प्राचीन चंचला माता मंदिर के अवशेष है। ऊपर के रास्ते पर मराठा कालीन शिकारगाह बना है जो प्राचीन समय मे सम्पन्न वन्य जीवन का प्रमाण है। शिव सेवक मंडल के भक्तजन यहा के सौंदर्य को बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। जलधारा की निरंतरता बनी रहे इसलिए सेवक मंडल कुंड की व परिसर की मरम्मत भी समय-समय पर करते रहते हैं। सम्पूर्ण ऐतिहासिक परिदृश्य के बारे में जब स्थानीय पुराविद डॉ प्रधुम्न भट्ट की राय जानी गई तो वे बताते है कि प्राचीन काल मे इंदरगढ़ नाम से बहुत बड़ी आबादी थी। जिसकी धार्मिक व आध्यत्मिक गतिविधि के केंद्र में यह शिवधाम था।यहा मोर्य युगीन एन बी पी पॉटरी मिली थी जो बताती है कि मोर्ययुग से पूर्व यँहा आबादी थी।विकसित नगर इंदरगढ़ था। यह झरना नगर के बीच से बहकर जलापूर्ति करता था। बड़ा महादेव सचमुच आध्यात्म व संस्कृति का केंद्र था।


