देश

भ्रामक सूचना फैलाने वाले 97 फीसदी अकांउट किए Block:केंद्र सरकार की सख्ती के बाद एक्शन मोड में Twitter

नई दिल्ली। 26 जनवरी को लाल किले (Red Fort) पर हुई हिंसा के बाद से ट्विटर (Twitter) पर केंद्र सरकार का दबाव दिख रहा है। ट्विटर पर ऐसे भड़काऊ और भ्रामक सामग्री पोस्ट की गईं जिसके बाद से केंद्र सरकार और ट्विटर के बीच विवाद चला। हालांकि केंद्र सरकार की सख्ती का असर अब दिखने लगा है। किसानों के प्रदर्शन के बारे में भड़काऊ और भ्रामक सामग्री पोस्ट किए जाने के बारे में केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की शिकायत पर टि्वटर ने ऐसे 97 प्रतिशत से अधिक अकाउंट ब्लॉक कर दिये। सूत्रों ने यह जानकारी दी। बुधवार को ट्विटर के प्रतिनिधियों और सूचना एवं प्रौद्योगिकी सचिव के बीच हुई एक बैठक के बाद यह कदम उठाया गया। बैठक में अमेरिकी माइक्रोब्लॉगिंग मंच को स्थानीय कानून का अनुपालन करने की सख्त हिदायत दी गई। साथ ही, यह भी कहा गया कि ऐसा नहीं करने पर उसे कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

मंत्रालय ने कानून व्यवस्था के लिए समस्या पैदा कर सकने वाली भड़काऊ सामग्री को ब्लॉक करने के आदेश पर कार्रवाई करने में हो रही देर के बारे में भी ट्विटर से सवाल किया, जबकि उसने (अमेरिकी कंपनी) यूएस कैपिटल हिल (अमेरिकी संसद भवन परिसर) में हुई इसी तरह की घटना पर कार्रवाई करने में तत्परता दिखाई थी। सूत्रों के मुताबिक ट्विटर ने अब आदेशों का अनुपालन किया है और जिन अकाउंट पर आपत्ति जताई गई थी, उनमें से 97 प्रतिशत को ब्लॉक कर दिया गया है। इस विषय पर ट्विटर की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है।

क्या है पूरा मामला?

गौरतलब है कि किसानों के प्रदर्शन के बारे में भ्रामक सूचना फैलाने और भड़काऊ सामग्री पोस्ट करने को लेकर चार फरवरी को ट्विटर को पाकिस्तान और खालिस्तान समर्थकों से संबंध रखने वाले 1,178 अकाउंट ब्लॉक करने को कहा गया था। इसके पहले सरकार ने नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के सिलसिले में 257 ट्वीट और ट्विटर हैंडल ब्लॉक करने को कहा था। ट्विटर ने आदेशों का अनुपालन बस कुछ घंटों के लिए ही किया था। ट्विटर ने बुधवार सुबह कहा कि उसने भारत में 500 से अधिक अकाउंट निलंबित कर दिये हैं और कई अन्य तक पहुंच को ब्लॉक कर दिया है। हालांकि, यह भी कहा कि वह ‘समाचार मीडिया संस्थानों,पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और नेताओं के अकाउंट ब्लॉक नहीं करेगा क्योंकि ऐसा करना देश के कानून के तहत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूल अधिकार का हनन होगा।

Related Articles

Back to top button
Close
Close