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मैहर के नादन में शासकीय आयुर्वेदिक औषधि केंद्र बना खंडहर बिना डाक्टर के ही इस कोरोना महामारी में चल रहा उपचार घोर लापरवाही

मैहर के नादन में शासकीय आयुर्वेदिक औषधि केंद्र बना खंडहर बिना डाक्टर के ही इस कोरोना महामारी में चल रहा उपचार घोर लापरवाही
By Rohit Kumar Ojha
सतना से अमित विश्वकर्मा की रिपोर्ट
मैहर के नादन में शासकीय आयुर्वेदिक औषधि केंद्र बना खंडहर बिना डाक्टर के ही इस कोरोना महामारी में चल रहा उपचार घोर लापरवाही
मैहर। क्षेत्र के नादन ग्राम पंचायत में शासन द्वारा संचालित शासकीय आयुर्वेदिक औषधि केंद्र जिसमे मरीज उस खंडहर जैसे केंद्र देख कर और गंभीर बीमारी से ग्रसित हो सकता है आपको बता दे कि वर्षो पुराने शासकीय आयुर्वेदिक औषधि केंद्र की भवन इतनी जर्जर है कि अंदर घुसने के बाद और भी भयानक लगता है ऐसा लगता है जब ये भवन बना उसके बाद कभी रंगरोहन नही हुआ जिसमें डॉक्टर सहित करीब चार लोग पदस्त है उसके बाद भी मौके पर केवल एक महिला जो महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता के सहारे चल रहा है यही नही मौके पर रखी सालों से आयुर्वेद की दवाओं का भी लगता है कि कभी इस्तेमाल नही हुआ जिसमें कुछ एक्सपायरी डेट भी हो चुकी है जिसको हटाया तक नही गया मनमानी की तरह ही ये शासकीय आयुर्वेदिक औषधि केंद्र नादन का चलता है मौके पर जब देखा गया तो इस भारी महामारी के दौर में शासन द्वारा हर स्तर पर लोगो की मदद को लेकर अंग्रेजी एवम आयुर्वेदिक दवाओं का भरपूर दवाएं उपलब्ध करा रही है शहर से लेकर गांवों तक लेकिन इस केंद्र में पिछली कोरोना महामारी में त्रिफला चूर्ण आई थी लेकिन इस बार त्रिफला चूर्ण अभी तक केंद्र में नही आया पूछने पर ये बताया गया कि सतना में रखी है नादन केंद्र में नही आई ? वही एक डॉक्टर जो 19 अप्रैल से ही छोटा बच्चा होने की बात पर शासन से छुट्टी लिए है जिसकी स्थान पर मरीजो की देखरेख सुमित्रा पांडेय जो कि महिला स्वस्थय कार्यकर्ता नादन के पद पर पदस्त है उन्होंने संभाला है जब कि ये कार्यकता को किसी भी मरीज को देखने का अनुभव शासन द्वारा नही है उसके बाद भी डॉक्टर का काम खुद संभाली है अब ये गलत है या सही शासन ही तय करे, बात यही नही खत्म होती जिला की अधिकारी भी इस पर कभी नजर नही डाली की जब एक डॉक्टर छुट्टी पर है तो दूसरे डॉक्टर को डियूटी पर रख दे? वो भी जान कर अनदेखा किया गया उससे भी बड़ी बात की जब इस भयंकर कोरोना वायरस को लेकर महामारी चल रही है इसको लेकर शासन द्वारा भेजे गए त्रिफला चूर्ण का भी अता पता नही यानी सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार कई महीनों से किसी भी प्रकार की कोई आयुर्वेदिक दवाई नही इस केंद्र में लाई गई या यूं कहें कि भगवान भरोसे शासकीय आयुर्वेदिक औषधि केंद्र पर होता है, चार लोग पदस्त है इस केंद्र में लेकिन सूत्रों की माने तो एक महिला कार्यकता ही ईमानदारी से डियूटी देती है बाकी केवल शासन व जनता का पैसा हर माह डियूटी के नाम पर शासन से वशूलती है। इलाज इस महामारी में इस तरह की बड़ी लापरवाहियों का कौन जिम्मेदार है??? कई लोगो ने नाम न बताने के शर्त पर बताया है कि शासकीय आयुर्वेदिक औषधि केंद्र नादन में केवल डियूटी के नाम पर शासन का पैसा डकारते है काम भगवान भरोसे रहता है अब देखना है शायद मीडिया की पहल पर शायद सतना कलेक्टर साहब संज्ञान में लेकर कुछ सुधार करें यही अपेक्षा है नादन क्षेत्र की जनता को।

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