गंजबासौदा।सडक पर बिक रहे मटके किए जप्त सड़क पर बिक रहे मटको को एसडीएम ने नगरपालिका की गाड़ी में भरवाकर किए जप्त। बच्चों ने लाख की विनती लेकिन नहीं माने प्रशासन के अधिकारी।

गंजबासौदा से बृजेश विश्वकर्मा की रिपोर्ट
शहर में एसडीएम राजेश मेहता ने आला अधिकारियों के साथ सड़क किनारे मटके बेच रहे बच्चों पर कोरोना गाइडलाइन का उल्लंघन का हवाला देते हुए कार्रवाई कर दी और बच्चों के दर्जनों मटके नगर पालिका की गाड़ी बुला कर जप्त कर लिए बच्चों ने प्रशासन के आला अधिकारियों से हाथ जोड़कर निवेदन किया लेकिन साहब दुकान यहां क्यों लगाने पर बच्चों पर बरसते रहे, रोते बिलखते बच्चों ने कहा हम किसी प्रकार की भीड़ लगाकर मटके नहीं बेच रहे थे फिर भी प्रशासन ने हमारे मटके जप्त कर लिए।
तस्वीरों में आप देख रहे हैं कि नगर पालिका के कर्मचारी दर्जनों मटके नगर पालिका की गाड़ी में भरकर ले जा रहे हैं आप यह सोच रहे होगे गर्मी को देखते हुए नगरपालिका शहर में प्याऊ की व्यवस्था करेगी इसलिए शायद दर्जनों की तादाद में मटके भरकर ले जा रहे हैं लेकिन आप गलत सोच रहे हैं दरअसल दर्जनों मटके एसडीएम साहब के आदेश पर गरीब बच्चों से जप्त किए हैं उनका गुहान यह था कि वह सड़क के किनारे मटके बेच रहे हैं कोरोनावायरस का उल्लंघन है लेकिन गरीब बच्चों की माने तो उनकी यह बेचना मजबूरी थी पूरे साल धंधे चौपट रहा, गर्मी के सीजन में थोड़ी खरीददारी होती थी इसलिए इस बच्चे ने ब्याज से पैसे लेकर मटके बनवाए और जय स्तंभ चौक पर बैठने आ गया लेकिन साहब को बच्चे पर तरस नहीं आया और पुलिस, नगर पालिका के साथ साहब ने गरीब बच्चों के मटके नगर पालिका की लोडिंग गाड़ी बुला कर तारे भरवा दिए बच्चा रोता रहा भी बिलखता रहा माफी मांगता रहा लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने जरा सी भी नहीं सोची और मटके भरकर ले गए वही बच्चे पर चालानी कार्रवाई करने की भी बात कही।
वही बच्चे का कहना था कि मेरे घर में मां खत्म हो गई है पैसे नहीं है हमारी मजबूरी है कि हम कुछ बेच कर घर का गुजारा कर सकें हमारी दुकान पर ज्यादा भीड़ भी नहीं थी हम शासन की गाइडलाइन का पालन कर रहे हैं दिन में एक या दो ही मटके बिकते हैं जैसे तैसे घर का गुजारा चल जाता है लेकिन साहब ने हमारे साथ अन्याय कर दिया।।
वही इस संबंध में जब नगर पालिका सीएमओ से बात करना चाही तो वह अपनी गाड़ी में बैठ कर बिना कुछ किए ही चलती बनी ,पूर्व विधायक निशंक जैन का इस मामले में कहना है कि इस तरह की कार्रवाई बिल्कुल सही नहीं है एक तरफ प्रशासन शादी को अनुमति दे रहा है दूसरी तरफ दुकानें बंद करने के आदेश जब शादी होगी तो दूल्हा बिना कपड़ा का हार का कैसे तैयार होगा यह सोचने वाली बात है।


