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पावर प्लांट को भूमि देकर फंसे गरीब किसान सरकार द्वारा पट्टे पर दी भूमि का भी हो गया ओने पौने दाम विक्रय ।

गोटेगांव एक ओर जहां देश में लागू किये जा रहे कृषि कानूनों से किसानों को आर्थिक स्तर पर लाभ होगा और कृषि कानूनों से उनका लाभ होगा यह बताया जा रहा है ऐसे में वर्तमान केंद्र सरकार के ही दो मंत्रियों के क्षेत्र में पिछले कई सालों से पावर प्लांट के नाम पर सरकार द्वारा कृषि हेतु पट्टे पर मिली भूमि के सरकार द्वारा अधिग्रहण किये जाने से अपनी कृषि भूमि सहित अपने रोजी रोजगार से वंचित सैकड़ों गरीब किसान आज भी बेहद निराशाजनक स्थिति में जीवन जी रहे हैं । मामला नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव तहसील का है जहां स्थित सिलारी, दलपतपुर,खमरिया, पुरा, एवं बूढ़ी मवई गांव में टुडे होम्स एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा. लिमिटेड द्वारा थर्मल पावर स्टेशन हेतु पावर प्लांट लगाए जाने हेतु टुडे होम्स एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. एवं मध्यप्रदेश शासन एनर्जी डिपार्टमेंट के बीच 17 जनवरी 2007 को एमओयू हस्तांतरित किया गया था । इस सम्बंध में कलेक्टर नरसिंहपुर द्वारा आयुक्त जबलपुर को सम्बोधित पत्र क्रमांक 371-भू अर्जन,08 दिनांक 10.1.2008 एवं पत्र क्रमांक 441 भू अर्जन-08 दिनांक 5.5.2008 के द्वारा 350.58 एवं 63.989 हेक्टेयर निजी भूमि के अर्जन हेतु राज्य शासन की स्वीकृति मांगी गई थी । करारनामा के अनुसार जिन ग्रामीणों की निजी भूमि ली गई थी उन कृषक परिवारों के कम से कम एक सदस्य को मध्यप्रदेश शासन राजस्व विभाग के पत्र क्रमांक एफ 12-4-08 सात-2 ए, भोपाल दिनांक 30.9.09 एवं पत्र क्रमांक 2548-09-सात- 2 ए दिनांक 13.10.2009 के अनुसार आदर्श पुनर्वास नीति 2002 में दिए निर्देश के अनुरूप नोकरी देंगी, किंतु काफी लंबा समय बीत जाने के बाद भी सैकड़ों लोगों की जमीन जो पावर प्लांट लगाने के लिए कंपनी ने खरीदी थी वह आज भी बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं । तब से लेकर अब तक लगभग 10-11 साल बीतने को हैं किंतु उक्त प्रोजेक्ट पूर्ण नहीं हो पाया और आज भी उन गरीब किसानों की जमीनों पर कोई निर्णय सरकार नहीं ले पाई है मामला जबलपुर हाईकोर्ट में लंबित है और वहां पर ना अभी पावर प्लांट लगा है और ना ही लोगों को रोजगार की व्यवस्था की गई है गरीब जैसे तैसे अपना जीवन गुजार रहे हैं महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन लोगों को सरकार द्वारा कृषि हेतु पट्टे जारी कर कृषि भूमि प्रदान की गई थी ऐसे अनुसूचित जाति जनजाति के लगभग 72 लोगों को सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की सुध भी नहीं ली जा रही है, महत्वपूर्ण बात यह है कि यह लोग अनेक स्तरों पर कई बार आवेदन ज्ञापन भी दे चुके हैं जिसपर फिलहाल उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है

गोटेगांव से सीताराम रजक की रिपोर्ट

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