जुन्नारदेव-विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करे सरकार- सूरज ज्ञानेश्वर विश्वकर्मा
देवी देवताओं को जातियों मे बांट कर सरकार कर रही भेदभाव

ज्ञानेश्वर विश्वकर्मा की रिपोर्ट
देवी देवताओं को जातियों मे बांट कर सरकार कर रही भेदभाव
विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करे सरकार – सूरज ज्ञानेश्वर विश्वकर्मा
अखिल भारतीय विश्वकर्मा छात्र संघ अध्यक्ष ,जिला छिंदवाड़ा एवं युवा पत्रकार सूरज ज्ञानेश्वर विश्वकर्मा ने अपने एक बयान में कहा है कि देवी-देवताओं महापुरुषों एवं राजनेताओं को भी जातियों में बांट कर सरकार भेदभाव कर रही है उन्होंने कहा है कि अनेक देवी-देवताओं धर्मगुरु महापुरुषों स्वतंत्रता सेनानियों और राजनेताओं के नाम पर उनके सम्मान में राष्ट्रीय एवं राजकीय अवकाश घोषित है तो देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा के नाम पर उनके सम्मान में अवकाश के सवाल पर सरकार भेदभाव और उपेक्षा क्यों कर रही है उन्होंने कहा है कि सृजन के देवता विश्वकर्मा किसी जाति विशेष वर्ग एवं समूह की सीमा में सीमित नहीं है वह सभी जाति धर्म एवं समूह के द्धारा सर्व सर्वत्र पूजित है और 17 सितंबर को प्रति वर्ष पूरे देश में भगवान विश्वकर्मा का पूजन दिवस मनाया जाता है संस्थानों में काम करने वाले सभी अधिकारी और कर्मचारी गण अपने कार्य बंद कर धूमधाम से भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं यह पर्व आस्था श्रद्धा से जुड़ा है पौराणिक उपनिषदों और ग्रंथों के अनुसार देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं और मानव जाति के कल्याण तथा विकास में अविस्मरणीय योगदान किया है यह एक ऐसे देवता हैं जिन्होंने किसी से कुछ नहीं मांगा और कुछ नहीं लिया सदैव निर्विवादित रहे है । भगवान विश्वकर्मा करोड़ों विश्वकर्मा वंशीय के आस्था संस्कृति गौरव और स्वाभिमान के प्रतीक हैं विश्वकर्मा पूजा का अवकाश रद्द करके सरकार आस्था पर कुठाराघात तथा पहचान मिटाने का षड्यंत्र कार्य कर रही है उन्होंने कहा देवी देवताओं के नाम पर सरकार की ओर से किया जा रहा भेदभाव और समानता और अन्याय का प्रतीक है मौजूदा सरकार में जातीय आधार पर सर्वाधिक भेदभाव और उत्पीड़न हो रहा है जिसका परिणाम आगामी समय के लिए विकट दिखाई देता है इसलिए समाज का इस दिवस को अवकाश के लिए सर्व विश्वकर्मा समाज संकल्पित है जब तक यह अवकाश घोषित नहीं होगा संघर्ष जारी रहेगा।


