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हलछट महोत्सव- मध्यप्रदेश के पन्ना में विश्व प्रसिद्व श्री बल्देव जी मंदिर मे जन्मोत्सव की धूम।

सोलह कलाओं से परिपूर्ण है मंदिर की संरचना। रोम के कैथलिक चर्च की संरचना जैसा है श्री बलदेव मंदिर।


पन्ना से राकेश पाठक की स्पेशल रिपोर्ट ।

मध्यप्रदेश के पन्ना में विश्व प्रसिद्व श्री बल्देव जी मंदिर मे जन्मोत्सव की धूम।

वैसे तो पन्ना पवित्र नगर पन्ना मे कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है लेकिन पन्ना मे स्थित श्री बल्दाऊ जी का मंदिर भक्तो की विशेष आस्था का केन्द्र है…इस मंदिर मे श्री कृष्ण के बडे भाई श्री बल्दाऊ जी की विशाल सालिगराम प्रतिमा विराजमान है सम्पूर्ण ब्रम्हाण को शेषनाग के रूप मे फन पर धारण करने वाले सृजनन इस सृष्टि के कल्याण हेतु मानव अवतार लिया जिन्हे बल्दाऊ कहा गया….. शेषा अवतार बल्दाऊ भईया का जन्मोत्सव आज देश के एकलौते श्री बल्देव जी मंदिर पन्ना मे पूरी भव्यता व श्रद्वा के साथ मनाया गया…. श्री बल्देव जी जिनके एक हांथ मे हल और दुसरे हांथ मे मूसल लिये शालिग्राम पत्थर की प्रतिमा विराजमान है । मंदिरो, हीरो और झीलो की नगरी से जाना जाने वाला पन्ना चारो ओर से घने जंगल और पहाडियो से घिरा पवित्र नगर पन्ना मे इन दिनो श्री बल्देव जन्मोत्सव जिसे हलछठ महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है इस त्यौहार को लेकर जन-जन मे उत्सुकता और उत्साह है…. पवित्र नगर पन्ना मे विश्व के अद्वितीय मंदिर है जिनमे मुख्य रूप से श्री पद्मावती देवी जी मंदिर, श्री जुगल किशोर जी मंदिर, श्री प्राणनाथ जी मंदिर, श्री बल्देव जी मंदिर, श्री जगन्नाथ स्वामी जी मंदिर, श्रीराम जानकी मंदिर एंव श्री गोविंद जी मंदिर सहित सैकड़ो मंदिर स्थापित है… ये सभी मंदिर रियासत कालीन राजा महाराजाओ के द्वारा बडी ही धार्मिक आस्था के साथ बनवाये गये है।

हजारो की संख्या मे श्रद्वालू बडे ही भक्ति भाव से इस कार्यक्रम मे शामिल होते है...
हजारो की संख्या मे श्रद्वालू बडे ही भक्ति भाव से इस कार्यक्रम मे शामिल होते है…

पन्ना मे स्थित विश्व प्रसिद्व अद्वितीय संरचना से स्थापित श्री बल्देव जी के मंदिर मे हलछठ महोत्सव का प्रतिवर्ष आयोजन किया जाता है इस बार भी पन्ना के श्री बल्देव जी मंदिर मे हलछत महोत्सव की धूम देखने को मिली और बडी संख्या में पन्ना ही नही बल्कि दूर-दूर से हजारो की संख्या मे श्रद्वालु इस महोत्सव मे शामिल होने के लिये आये।  इस महोत्सव मे श्री बल्देव जी मंदिर को बडे ही आकर्षण ढंग से सजाया गया है…..ठीक 12 बजे भक्तो को बडे इंतीजार के बाद भगवान के दर्शन हुये…भक्त कई घण्टो पहले से भगवान के दर्शन का इंतीजार कर रहे थे… पन्ना जिले मे इस महोत्सव का एक अलग ही महत्व रहता है… श्री बल्देव जी मंदिर का महत्व इसलिये और भी अधिक बढ़ जाता है क्यूकि इस संरचना का मंदिर पूरे विश्व मे कही और नही है…और यह अपने आप मे अनूठा एक मात्र मंदिर है।
इस दिन महिलाये अपने पुत्र प्रप्ति के लिये हलछठ का वृत रखती है.. वही मंदिर मे दर्शन करने आये श्रद्वालुओ मे अलग ही प्रकार की आस्था देखने को मिलती है।

सोलह कलाओं से परिपूर्ण है मंदिर की संरचना।
सोलह कलाओं से परिपूर्ण है मंदिर की संरचना। रोम के कैथलिक चर्च की संरचना जैसा है श्री बलदेव मंदिर।

यह मंदिर 16 कलाओ से परिपूर्ण है जिसमे प्रवेश द्वार मे 16 सीढिया, अंदर प्रवेश करने पर 16 विशाल पिलर एंव 16 दरवाजे, मंदिर के ऊपर 16 गुम्बदे इसके साथ-साथ 16 खिडकिया बनी हुई है… साथ ही निर्माण सम्बद्व 1933 का संधी विग्रह करने पर जैसे अग्नि 3 प्रकार की दैहिक, दैविक और भौतिक….. आकाश पाताल धारा 3 ….. शरीर के क्षिद्र 9 पृथ्वी 1 इस प्रकार इनका योग करने पर 16 ही आता है । यहाँ यह बताना उल्लेखनीय है कि रियासत काल मे पन्ना के महाराजा रूद्र प्रताप सिंह विंद्रावन गये तो वहां कि प्रकृति बहुत ही ज्यादा फूली-फली थी वे अपने साथ अपार धन सम्पदा लेकर गये थे…. जो उन्होने वहा के ब्राम्ह्णो को दान मे दिया…. इस मंदिर का निर्माण सन् 1876 मे कराया गया…

श्री कृष्ण के बडे भाई कृषि प्रधान समृद्वि के देवता है श्री बल्देव जी।

भगवान श्री बल्देव जी के अंनत नाम है जिनके अस्त्र-शस्त्र हल और मूसल है जिनको कृषि देवता एंव भगवान शेषनाग का अवतार भी कहा जाता है… महा प्रलय के समय पर सम्पूर्ण विश्व को अपने मस्तक पर धारण करने वाले सभी नागो के नागराज प्रलय के समय 400 योजन दूर गई यमुना जी को अपने हल से खींच लेने वाले भगवान श्री कृष्ण के बडे भाई जिनको बल्दाऊ जी के नाम से जाना जाता है… हलछठ महोत्सव मे भगवान श्री बल्देव जी का जन्मोत्सव बडी ही धूम धाम से मनाया जाता है जिसमे दूर-दूर से हजारो की संख्या मे श्रद्वालू बडे ही भक्ति भाव से इस कार्यक्रम मे शामिल होते है… भगवान बल्देव जी ने आकाल के समय स्वंय कृषि कार्य करके किसानो को खेती करने का मार्ग दिखाया था।

रोम के कैथलिक चर्च की संरचना जैसा है श्री बलदेव मंदिर।

पन्ना मे रियासत कालीन महेन्द्र महाराजा रूद्र प्रताप सिंह बडे ही धार्मिक प्रवृत्ति के महाराजा थे… जिन्होने सम्बद्व 1933 यानी सन् 1876 मे इस भव्य अद्वितीय मंदिर का निर्माण कराया था जो भक्तो की अनन्य आस्था का केन्द्र है..ऐसा भी कहा जाता है कि इस मंदिर के निर्माण के लिये इटली से इंजीनियरो को मंदिर की डिजाईन करने के लिये पन्ना बुलाया गया था। भारत ही नही बल्कि विश्व मे यह मंदिर अद्वितीय तो है ही साथ ही भगवान बल्देव जी की प्रतिमा सालिगराम पत्थर से निर्मित है

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