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दिल्ली नतीजों में बड़ा उलटफेर! क्या 27 साल बाद BJP कर पाएगी राजधानी में ‘राज’? या AAP छुएगी जादुई आंकड़ा

दिल्ली विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों में भाजपा 41 सीटों पर आगे, जबकि आप 29 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। भाजपा नेताओं का दावा है कि दिल्ली में निर्णायक जीत हासिल होगी, जबकि आम आदमी पार्टी ने अंतिम परिणाम का इंतजार करने की बात की।

दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों पर सबकी निगाहें टिकी हैं। दिल्ली का मुख्यमंत्री कौन होगा, यह सस्पेंस का विषय बन गया है। जहां आप तीसरी बार हैट्रिक बनाने को आतुर है, वहीं भाजपा किसी तरह 27 साल के अंतराल के बाद राष्ट्रीय राजधानी में सत्ता में वापसी करना चाहती है।

दिल्ली में किसका होगा शासन?

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, शुरुआती रुझानों पर नजर डालें तो भाजपा 41 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) 29 सीटों पर आगे चल रही है।

‘दिल्ली की जनता भाजपा को निर्णायक परिणाम देगी’

भाजपा उम्मीदवार रमेश बिधूड़ी ने कहा, ‘‘दिल्ली की जनता भाजपा को निर्णायक परिणाम देगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दिल्ली देश के बाकी हिस्सों के साथ-साथ विकसित होगी। मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि राष्ट्रीय राजधानी से आप का पूरी तरह सफाया हो जाएगा।” आपको बता दें है कि रमेश बिधूड़ी आप नेता और दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

‘हम अंतिम परिणाम का इंतजार करें’

शुरुआती रुझान भाजपा को महत्वपूर्ण बढ़त दिखा रहे हैं। पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि इस बार दिल्ली में झंडा भगवा पार्टी का लहरा रहा है। अब तक के परिणाम हमारी उम्मीदों के अनुरूप हैं। लेकिन, हम अंतिम परिणाम का इंतजार करेंगे। भाजपा दिल्ली में “डबल इंजन सरकार” बनाएगी। उन्होंने कहा कि उन्हें इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह जीत प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता का परिणाम है।

वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि हम दिल्ली में एक मजबूत और स्थिर सरकार का गठन सुनिश्चित करेंगे। भाजपा ने दिल्ली में खस्ताहाल सड़कें, शराब नीति विवाद, गंदे पानी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ा।

भाजपा 1998 से दिल्ली में सत्ता में नहीं

भाजपा 1998 से दिल्ली में सत्ता में नहीं है। दूसरी ओर, पिछले 10 वर्षों से दिल्ली के राजनीतिक परिदृश्य पर आप का दबदबा रहा है। इसने 2015 और 2020 के चुनावों में भारी बहुमत से जीत हासिल की। 1998 से 2013 तक दिल्ली पर शासन करने वाली कांग्रेस पिछले दो चुनावों में एक भी सीट जीतने में असफल रही। 5 फरवरी को हुए चुनाव में दिल्ली में 1.55 करोड़ पात्र मतदाताओं के साथ 60.54 प्रतिशत मतदान हुआ।

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