मध्य प्रदेश में 15 साल पुरानी गाड़ियों पर रोक, नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

सर्दियों में भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और सिंगरौली समेत कई शहरों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है। खासतौर पर ग्वालियर की स्थिति दिल्ली जैसी गंभीर हो जाती है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के पार चला जाता है। इस बढ़ते प्रदूषण का मुख्य कारण पुरानी गाड़ियों से निकलने वाला धुआं और खराब सड़कें हैं।
15 साल से पुरानी गाड़ियों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल
राज्य सरकार दिल्ली की तर्ज पर एक नया नियम लागू करने जा रही है, जिसके तहत 15 साल से अधिक पुरानी पेट्रोल गाड़ियों और 10 साल से अधिक पुरानी डीजल गाड़ियों को ईंधन नहीं दिया जाएगा। यह कदम वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।
राष्ट्रीय स्तर की तर्ज पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम
मध्यप्रदेश सरकार, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) की तरह एक राज्य स्तरीय योजना बनाएगी। इस योजना के तहत उन शहरों को चिन्हित किया जाएगा जहां AQI 100 से अधिक है, और वहां प्रदूषण कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री के अहम निर्देश
- पिछले 5 सालों के AQI डेटा के आधार पर प्रदूषण प्रभावित शहरों की पहचान करें।
- कच्ची सड़कों को पक्का किया जाए और मुख्य सड़कों के किनारे पेवर ब्लॉक लगाए जाएं।
- सड़कों की गुणवत्ता बेहतर की जाए ताकि धूल प्रदूषण कम हो।
- गेहूं कटाई के समय पराली जलाने पर सख्त निगरानी रखी जाए और किसानों को पराली से भूसा बनाने के लिए प्रेरित किया जाए।
- औद्योगिक इकाइयों के कचरे का सही ट्रीटमेंट सुनिश्चित किया जाए।
पुरानी गाड़ियों का हब बनता मध्यप्रदेश
राज्य में पुरानी गाड़ियों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में पुरानी गाड़ियां यहां लाई जाती हैं। इन वाहनों की सही से जांच नहीं होती, जिससे ये सड़क पर धुआं छोड़ती हैं और लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचाती हैं। ठंड के मौसम में नमी के कारण इन वाहनों का धुआं और भी ज्यादा प्रदूषण फैलाता है।
बड़ा तालाब और रामसर साइटों का संरक्षण
मुख्यमंत्री ने भोपाल के बड़े तालाब की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि रामसर साइटों पर मूल संरचनाओं से छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
दिल्ली मॉडल अपनाने की तैयारी
दिल्ली सरकार द्वारा वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए लागू की गई नीति को मध्यप्रदेश भी अपनाने जा रहा है। दिल्ली में 1 अप्रैल से 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों और 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों को ईंधन नहीं देने का नियम लागू किया जा चुका है। मध्यप्रदेश भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है ताकि वायु प्रदूषण को प्रभावी रूप से कम किया जा सके।


