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सारोला गांव में भगवान गणेश की भव्य सवारी, परंपरा का निर्वहन और श्रद्धालुओं की आस्था

मध्य प्रदेश के ग्राम सारोला में हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की तृतीया को भगवान श्री गणेश के स्वरूप में हाथी की भव्य सवारी निकाली जाती है। यह सवारी गांव के इतिहास और परंपरा का एक अहम हिस्सा बन चुकी है, जिसे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष भी सवारी का आयोजन राम मंदिर से शुरू हुआ और राधा कृष्ण मंदिर तक जारी रहा, जहां भगवान श्री कृष्ण, राधा और रुक्मणी के रूप में बच्चों को हाथी पर विराजमान किया गया।

हाथी की सवारी, आस्था और मनोरंजन का अद्भुत संगम

सारोला की यह सवारी अन्य सवारियों से अलग है, क्योंकि इसमें ढोल-नगाड़े के बीच कुछ लोग आग से प्रदर्शन करते हैं और कुछ लोग भूत-प्रेत बनकर आकर्षण का केंद्र बनते हैं। सवारी के दौरान श्रद्धालुओं की मान्यता है कि इस आयोजन को देखने और भगवान गणेश के हाथी की पूजा-अर्चना करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं, यही कारण है कि आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं।

परंपरा में बदलाव, फिर भी संजीवनी का कारण

पहले सवारी में लकड़ी का हाथी निकाला जाता था, लेकिन अब लोहे का काला हाथी धूमधाम से सवारी का हिस्सा बन चुका है। यह परंपरा एक बार संकट के दौर से भी गुजरी थी, जब एक साल इसे न मनाने के कारण गांव में भीषण आग लग गई थी। इसके बाद श्रद्धालुओं ने इस संकट से उबरने के लिए हाथी की सवारी निकाली और मान्यता अनुसार माफी मांगकर संकट को टाला।

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