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INDORE BRTS : हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, शहर से हटेगा बीआरटीएस कॉरिडोर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर में बनाए गए बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (BRTS) कॉरिडोर को समाप्त करने का आदेश दिया है। कोर्ट की डबल बेंच ने एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए यह फैसला सुनाया। रिपोर्ट में कहा गया कि बीआरटीएस कॉरिडोर के कारण यातायात पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है और लोगों को इससे परेशानी हो रही है।

सामाजिक कार्यकर्ता की याचिका पर सुनवाई

बीआरटीएस प्रोजेक्ट के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी ने हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दायर की थीं। इंदौर खंडपीठ ने इन याचिकाओं की जांच के लिए 2013 में एक एक्सपर्ट कमेटी गठित की थी, जो बीआरटीएस कॉरिडोर की उपयोगिता पर विचार करती थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह बताया था कि बीआरटीएस लेन में अन्य वाहनों को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

नई कमेटी का गठन और जांच की प्रक्रिया

हाईकोर्ट ने सितंबर 2024 में एक नई कमेटी गठित करने का आदेश दिया, जो बीआरटीएस प्रोजेक्ट की वर्तमान परिस्थितियों में व्यावहारिकता का आकलन करेगी। कमेटी को आठ सप्ताह का समय दिया गया था और रिपोर्ट पेश करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। नवंबर 2024 में याचिकाओं को जबलपुर मुख्यपीठ में स्थानांतरित कर दिया गया था।

कमेटी की बैठक और रिपोर्ट का असर

हाईकोर्ट की युगलपीठ ने पाया कि जब से याचिका मुख्यपीठ में स्थानांतरित हुई, तब से कमेटी की कोई बैठक नहीं हुई थी। 12 फरवरी को कोर्ट ने आदेश दिया कि कमेटी एक सप्ताह के भीतर बैठक करे और दो दिन में रिपोर्ट पेश करे। कमेटी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि फ्लाईओवर के निर्माण के बाद भी बीआरटीएस कॉरिडोर के कारण यातायात पर दबाव बढ़ रहा है, जो नागरिकों के लिए असुविधा का कारण बन रहा है।

हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह निर्णय लिया कि वर्तमान परिस्थितियों में बीआरटीएस कॉरिडोर व्यवहारिक नहीं है और इसे समाप्त करने का आदेश जारी किया।

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