भानपुरा- कुंतलखेड़ी ग्राम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव संपन्न

दीपक रुद्रवाल
कुंतलखेड़ी ग्राम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव संपन्न
पंच तत्वों से बना शरीर प्रकृति का सबसे बड़ा जीता जाता मंदिर है महामंडलेश्वर मधुसूदनानंदजी महाराज कुंतलखेड़ी ग्राम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव संपन्न रविवार को भंडारे का आयोजन हुआ जीवन की कहानी जहां से शुरू होती है वहीं आकर समाप्त हो जाती है। जो हमारे अनुकूल होता है हमें प्रसन्नता सुख व खुशी देता है। वही जो अनुकूल नहीं होता है व मन की कल्पना से अप्रिय होता है वह दुःख देता है। मनुष्य के पास यदि 90 रुपए होते हैं तो वह सदा उसका उपयोग करने बजाय 100 पूरे करने के चक्कर में जिंदगी भर दुःखी रहता है। और यह क्रम कभी भी समाप्त नहीं होता है। जिंदगी को सुकून से जीने के लिए आत्म संतोषी होना जरूरी है। दूसरे की उन्नति देखकर जलन रखने वाला कभी भी आनंद पूर्वक अपना जीवन नहीं जी सकता है। हमारी मेहनत से प्राप्त अर्थ का सदुपयोग जरूरी है। श्रद्धा शक्ति मानव सेवा प्रदान करने वाला सदा सुखी रहता है। वंही जरूरत से ज्यादा अर्थ की प्राप्ति मनुष्य में मद पैदा करती है, ऐसे व्यक्ति में घमंड आ जाता है और यही उसकी बर्बादी का कारण होता है। यह बात अपने मुख से महामंडलेश्वर कामाख्या धाम असम के स्वामी मधुसूदननंदजी महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा के ग्राम पंचायत मुख्यालय कुंतलखेड़ी तहसील भानपुरा मैं भव्य आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही। स्वामी ने कहा कि जहां कहीं शांति मिले वह सबसे बड़ा सुकून है। आपने कहा कि पंच तत्व से बना शरीर ही प्रकृति का सबसे बड़ा जीता जागता मंदिर है। आपने कहा कि दुःख तो हर जगह है परंतु जो सुख ढूंढ ले वह सबसे बड़ा सुखी इंसान है। बहुत कुछ ईश्वर का दिया होने के बाद भी कई लोगों के रोने वाली आदत जीवन भर समाप्त नहीं होती है। आपने कहा कि हमारे प्रारब्ध मैं जो है वह हर हाल में मिलेगा। स्वामीजी ने कहा कि जीवन की कहानी जहां से शुरू होती है वहीं समाप्त हो जाती है। हम आत्मा को भूलकर शरीर के सुख दिखावे व वैभव में सदैव लगे रहते हैं। कथा के दौरान स्वामी ने कहा कि राजा हरिश्चंद्र जैसा कोई भी सत्यवादी राजा नहीं हुआ है। कथा में उपस्थित श्रद्धालुओं को कथा के दौरान स्वामी ने अपने प्रवचनों में कहा कि कोई भी घटना का घटना नई घटना को जन्म देता है आपने कहा कि राम भगवान के वनवास जाने के बाद यदि सीता हरण नहीं होता तो रावण का वध नहीं होता। कृष्ण भगवान यदि मथुरा नहीं छोड़ते तो कंस का वध नहीं होता। आपने जीवन का उत्कृष्ट उदाहरण निरूपित करते हुए बताया कि सवेरा इंसान का बचपन होता है दोपहर जवानी होती है। जिसमें व्यक्ति व्यापार व्यवसाय एवं अपने साधन जुटा ता है। साथ ही शाम बुढ़ापा होती है एवं रात्रि मृत्यु होती है। जिसने जीवन को संवार लिया वही सुखी रहता है। आपने वर्तमान में महिलाओं द्वारा मेकअप कर परेशान होने, दूरव्यसन कर इंसानों के लती होने एवं युवाओं के भारतीय संस्कृति को त्याग कर अजीबोगरीब तरह की हजामत बनाने को दुःखद बताया। आपने भारतीय संस्कृति अपनाने का आह्वान किया व कहा कि अपने जीवन में कभी बीमारी के सही उपचार के लिए डॉक्टर व आपके कर्मों को देखने वाले भगवान से कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए। इस अवसर पर शिव पार्वती की झांकी ग्राम कुंतलखेड़ी मैं उत्साह पूर्वक निकाली गई। श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का आयोजन विगत 2 अगस्त से प्रारंभ होकर 8 अगस्त संपन्न हुआ। इस अवसर पर रविवार 8 अगस्त को भव्य भंडारे का आयोजन रखा गया व कथा की पूर्णाहुति हुई।


