किसानों के लिए एकमुश्त समझौता योजना ला रही है शिवराज सरकार

प्रदेश की शिवराज सरकार लगातार किसानों के हित में योजनाएं बनाने और उन पर बेहतर क्रियान्वयन के लिए काम कर रही है। यही वजह रही कि पिछली भाजपा सरकार में प्रदेश को लगातार पांच बार कृषि कर्मण अवॉर्ड भी मिला।
प्रदेश सरकार ने अब राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के कर्जदार किसानों को अपनी हजारों हेक्टेयर भूमि छुड़ाने के लिए एकमुश्त समझौता योजना का प्रस्ताव तैयार किया है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में बैंक परिसमापन की प्रक्रिया में है और 80 हजार से ज्यादा किसानों से तकरीबन 26 सौ करोड़ रुपए की वसूली की जानी है। हालांकि इस राशि को प्राप्त करने के लिए और किसानों को बंधक भूमि वापस लौटाने के लिए वर्ष 2017 में समझौता योजना लाई गई थी। जिसमें 20 हजार किसानों ने करीब 83 करोड़ रुपए का कर्ज चुका कर करीब 49,500 हेक्टेयर भूमि को मुक्त करा लिया था।
दूसरी ओर राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अपने खराब प्रबंधन के कारण खुद कर्ज की गिरफ्त में फस गया और अंत तक वह इससे बाहर नहीं निकल पाया। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से शासन की गारंटी पर कर्ज लेकर उसने किसानों को दे दिया था लेकिन वह किसानों से इस कर्ज की वसूली नहीं कर सका। बाद में शासन ने नाबार्ड का तो कर्ज चुका दिया लेकिन सहकारी बैंक का कर्ज अब तक फंसा हुआ है।
ज्यादा वसूली नहीं हो सकी थी पिछली योजना में
किसानों से सहकारी बैंक का कर्ज वसूलने के लिए शिवराज सरकार ने पिछले कार्यकाल में एक योजना लागू की थी। जिसमें तीन किस्तों में मूलधन लौटाने पर ब्याज पूरी तरह माफ करने का प्रावधान था। उस दौरान करीब एक लाख किसानों ने लिखित सहमति जरूर जताई थी लेकिन सिर्फ बीस हजार किसानों ने ही कर्ज चुकाया। बहरहाल सरकार की इस योजना से जो उम्मीद थी वह पूरी नहीं हो सकी लेकिन किसानों को इससे 213 करोड़ रुपए की ब्याज माफी जरूर मिली।
सहकारी समितियों के माध्यम से वसूली संभव
जिला सहकारी बैंक के अधिकारियों का कहना है कि भले ही बैंक परिसमापन की प्रक्रिया में है पर किसानों के ऊपर कर्ज चढ़ा हुआ है और यह बरकरार रहेगा। बैंक के पास बंधक भूमि को ना तो बेचा जा सकता है और ना ही उस पर कर्ज लिया जा सकता है। वसूली के लिए सहकारिता विभाग ने प्रस्ताव दिया है कि 38 जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों को यह जिम्मा सौंप दिया जाए। वे सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों से वसूली करें और उस राशि को सरकार को सौंप दें। इस काम के लिए उन्हें प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
कैबिनेट में होगा निर्णय
वर्तमान में जिला सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक को किसानों से छब्बीस सौ करोड़ रुपए लेने हैं। इसमें मूलधन लगभग 700 करोड रुपए हैं। वहीं पचास हजार हेक्टेयर से ज्यादा भूमि बैंकों के पास किसानों की बंधक है। इसे छुड़ाने के लिए किसानों को कर्ज चुकाना होगा। जो बिना समायोजन के संभव नहीं है। यही वजह है कि प्रदेश सरकार ने एक बार फिर एकमुश्त समझौता योजना का प्रस्ताव तैयार किया है। जिस पर अंतिम निर्णय कैबिनेट में लिया जाएगा।


