भिंड- नगरीय प्रशासन आवास राज्यमंत्री ओ पी एस भदौरिया ने कचनार कला में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में पहुँचकर आरती की
पवन शर्मा की रिपोर्ट

नगरीय प्रशासन आवास राज्यमंत्री ओ पी एस भदौरिया ने कचनार कला में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में पहुँचकर आरती की
भिंड- भाजपा के वरिष्ठ नेता मध्य प्रदेश सरकार में नगरीय प्रशासन आवास राज्यमंत्री ओ पी एस भदौरिया ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा और रामचरितमानस भव सागर है बाबा गोस्वामी तुलसीदास ने चित्रकूट पर रामायण की रचना कर हम सबको सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति और मर्यादा भगवान पुरुषोत्तम राम एवं भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं के माध्यम से मानव जीवन के लिए संजीवनी का काम करती है जिसका हम सबको स्मरण करना चाहिए जो व्यक्ति सच्चे भाव से कथा और रामलीला का मंचन सुनते हैं जिसका रस आनंद प्राप्त करेगा भगवान उसी के हृदय में विराजमान हो जाएंगे, कथावाचक हो या रामलीला या कृष्ण लीलाओं के कलाकारों द्धारा सुंदर मंचन एवं व्यास द्धारा जो श्रीमद् भागवत कथा का आप सभी को अपने मुखारविंद से भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का कथा के माध्यम से रसानंद दे रहे हैं जिसे हमें अमृत समझ कर कर पी जाना चाहिए | यह उद्गार उन्होंने मेहगांव विधानसभा क्षेत्र के कचनार कला में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तहत जनसमूह को संबोधित करते हुए व्यक्त किए राज्यमंत्री भदौरिया ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा राम कथा और रामलीला मंचन यह हमारे जीवन का मुख्य आधार है इस समाज में हमें इसका प्रसार करना चाहिए ताकि हमारी हिंदुत्व भावना और हमारी भारतीय संस्कृति की मुख्य पहचान के साथ-साथ सनातन धर्म को मजबूती का काम कर सकें |उन्होंने कहा कि कार्यक्रम प्रतिवर्ष आयोजित होती रहे जिससे हमें हमारी संस्कृति का लोगों को मालूम हो सके और हम इस देश को रामराज्य की ओर आगे बढ़ा सकें साथ ही आरती में शामिल हुए और इस सफल कार्य के लिए उन्होंने बधाई दी |उन्होंने कहा कथा ही हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है जिसे हम सच्चे मन और भाव से स्मरण करेंगे तो निश्चित ही हमारे शरीर में भगवान रूपी ईश्वरी शक्ति प्राप्ति होगी और हम सनातन धर्म को मजबूती की ओर आगे बढ़ा सकेंगे, ऐसा भाव हम सबके मन में जागृत होना चाहिए |राज्यमंत्री भदौरिया ने कहा पृथ्वी पर अत्याचारों का भार आने के लिए उन्होंने अयोध्या नरेश राजा चक्रवर्ती सम्राट दशरथ के परिवार में जन्म लिया और जिस प्रकार महारानी के कई नए संकल्प के साथ उन्हें 14 वर्ष के वनवास को देने के लिए दो वचन राजा से मांगे थे और बनवास पूर्ण होने के बाद लंका पर विजय करते हुए अयोध्या वापस लौटे और मां के तनु गुरु वशिष्ट को उन्होंने प्रणाम और पृथ्वी के अत्याचारों को राक्षसों से मुक्त कराकर उन्होंने विजय प्राप्ति की l


