ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले सुलझाने पर उज्जैन की साइबर सेल को मिल चुका है सिक्योरिटी ऑफ इंडिया एक्सीलेंस अवार्ड: एफबीआई भी हुई मुरीद

मप्र पुलिस द्वारा दो साल पहले साइबर अपराधों पर लगाम लगाने और अपराधियों को सींखचों के अंदर पहुंचाने के लिए शुरू की गई मुहिम इन दिनों देश के साथ ही विदेशों में भी चर्चा का विषय बन चुकी है। इसके लिए प्रदेश की साइबर पुलिस द्वारा जिस कार्यशैली को अपनाया गया है, उसकी तो अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई तक मुरीद हो गई है। यही वजह है कि उसके द्वारा इसकी प्रशंसा तक की जा चुकी है। मप्र पुलिस के साइबर शैल के काम करने के तरीके का यह असर होना शुरू हो चुका है कि अब इससे संबंधित अपराधियों ने पकड़े जाने के भय से प्रदेश से दूरियां बनाना शुरू कर दिया है। इस वजह से अब ठगी के मामलों की शिकायत आना भी कम हो गया है। अब प्रदेश की इसी कार्यशैली को लेकर केरल राज्य की साइबर पुलिस ने सलाह मांगी है। दरअसल साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को ठगने के लिए तरह-तरह के तरीके अपनाए जाते हैं। वे लोगों को कई तरह के झांसे देकर ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाकर गायब हो जाते हैं। इस कार्यप्रणाली को देखते हुए ही मप्र की साइबर पुलिस ने बेहतर पेशेवर तरीके को ईजाद कर उन पर लगाम लगाने की पहल की है। इस वजह से न केवल अपराधी पकड़े जा रहे हैं, बल्कि ठगी के शिकार लोगों को पैसा भी वापस कराने में बड़े पैमाने पर सफलता भी मिल रही है। इस मामले में काम करने वाले मप्र के सायबर निरीक्षकों को सिक्योरिटी काउंसिल आॅफ इंडिया द्वारा एक्सीलेंस अवार्ड भी मिल रहे हैं। इस मामले में मप्र लगातार दो साल से उपविजेता बन रहा है। बीते वर्ष का सिक्योरिटी ऑफ इंडिया एक्सीलेंस अवार्ड साइबर पुलिस की उज्जैन इकाई को मिल चुका है। यह अवॉर्ड उसे देशभर में बतौर उपविजेता रहने की वजह से मिला है। इस अवॉर्ड की वजह बनी है वह विवेचना जिसे निरीक्षक नरेन्द्र गोमे द्वारा किया गया था। यह मामला आॅनलाइन धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ था। इसके पूर्व के वर्ष 2019 में भी इसी तरह का पुरस्कार निरीक्षक अभिषेक सोनकर को भी मिल चुका है। खास बात यह है कि विवेचना की श्रेणी में इन दोनों ही निरीक्षकों को पहला पुरस्कार मिला है।
केरल ने मांगा कार्यशैली का ब्यौरा
मप्र के लिए एक और उपलब्धि यह है कि सायबर अपराध की जांच की कार्यपद्धति की जानकारी केरल ने भी मांगी है। इसके साथ यह भी सलाह मांगी है कि किस तरह से साइबर अपराध को समाप्त करने के लिए बेहतर कदम उठाए जाने चाहिए। यही नहीं केरल पुलिस द्वारा आवश्यक सेटअप में बदलाव के लिए भी सलाह मांगी गई है। इसको लेकर बीते दिनों केरल पुलिस की साइबर सेल का एक पत्र भी पुलिस मुख्यालय में स्थित सायबर सेल को मिल चुका है। इसमें इस तरह के अपराधों पर लगाम लगाने में मदद के साथ ही मार्गदर्शन भी मांगा गया है।
हाल ही में एक बड़े मामले में मिली सफलता
हाल ही में प्रदेश की साइबर पुलिस को एक ऐसे मामले में सफलता मिली है, जिसमें चैक का क्लोन तैयार कर धोखाधड़ी की गई थी। इस मामले में साइबर पुलिस ने न केवल उसके आरोपी को पकड़ा है, बल्कि कई अन्य प्रदेशों से इसी तरह की ठगी करने वाले ठग को भी पकड़ा गया है। यही नहीं प्रदेश की साइबर सेल द्वारा अन्य राज्यों की तुलना में जामतार माड्यूल सहित अन्य कई तरह से ठगी करने वाले ठगों का भंडाफोड़ करने में अधिक सफलता हासिल की है। यही नहीं ऐसे मामलों में प्रदेश की साइबर पुलिस द्वारा कई अन्य प्रांतों से भी आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता मिल चुकी है।


