जावरा। संस्कृति के 2 माह पूर्ण होने पर दिया प्रकृति स्नेही बनने का संदेश
गांव भूतेडा में एक पर्यावरणविद् शिक्षक ~रामदयाल पाटीदार,ने अपनी पोती संस्कृति पाटीदार, का जन्मदिन कुछ ऐसे मनाया, पाटीदार ने बताया

जावरा से नागेश्वर धाकड की रिपोर्ट ,
बालिका अभी २ माह की हुईं है, उसका नामकरण संस्कार करते हुए ” संस्कृति” रखा ताकि हरियाली के प्रति सजग रहने के लिए हमने उसका नाम संस्कृति रखा,
~भूतेडा के – रामदयाल पाटीदार,वर्तमान में (बिल्लाखेडा) में स्कूल प्रभारी हे,
प्रकृति के प्रति लापरवाही का नतीजा सभी कोरोना काल मे देख ही चुके है प्रकृति से मित्रवत व्यवहार ही स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए उपयोगी है!इसका सजीव चित्रण पाटीदार परिवार द्वारा किया गया! बेटी संस्कृति के जन्म को 2 मास पूर्ण होने पर पाटीदार परिवार द्वारा “प्रकृति की छांव में संस्कृति” नाम से थीम बनायी गयी तथा प्रकृति के सानिध्य में कितना सकूँन मिलता है इसका सुंदर दृश्य बना कर जन्म उत्सव मनाया गया!
चित्र में नीम की छांव एवं घांस के बिछोने पर बेटी संस्कृति झूले पर नींद की मुद्रा में प्रकृति रूपी माँ के स्नेह में आराम कर रही है! निश्चित रूप से प्रकृति और पर्यावरण का सानिध्य माता और पिता की तरह ही है
बेटी संस्कृति के दादा शिक्षक रामदयाल पाटीदार निवासी भूतेड़ा एवं बेटी की माता मीनाक्षी दिनेश पाटीदार ने कहा कि प्रकृति से जैसा व्यवहार हम रखेंगे वेसे ही परिणाम हमे प्राप्त होंगे!अब समय आगया है कि सोशल मीडिया और दिखावे से ऊपर उठ कर प्रकृति और पर्यावरण के प्रति व्यक्तिगत कदम उठाने चाहिए!
“प्रकृति की छांव में बेटी संस्कृति” थीम को बनाने में नव्या पाटीदार,नेहा पाटीदार,प्रीति पाटीदार,प्रतीक्षा पाटीदार,जया पाटीदार,प्रियंका पाटीदार का सहयोग रहा सभी ने पर्यावरण एवं प्रकृति को नुकसान ना पहुचाने की अपील की!


