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राजगढ़-*माचलपुर की चोर बावड़ी ” पाषाण कला का बेजोड़ नमूना*

माचलपुर की “चोर बावड़ी” अपनी शैल कला और बेजोड़ बनावट के लिए काफी प्रसिद्ध है।
शम्भू दयाल टेलर की रिपोर्ट
*माचलपुर की चोर बावड़ी ” पाषाण कला का बेजोड़ नमूना*

राजगढ़:- राजगढ़ जिला में यूं तो अनेक ऐतिहासिक इमारतें,महल और बावड़ियां है लेकिन उन तमाम ऐतिहासिक विरासतों में माचलपुर की “चोर बावड़ी” अपनी शैल कला और बेजोड़ बनावट के लिए काफी प्रसिद्ध है।
राजगढ़ जिले की जीरापुर तहसील के माचलपुर नगर में ग्राम पोल खेड़ा जोड़ के निकट स्थित यह बावड़ी दिखने में मुगलकालीन लगती है लेकिन ऐसा स्पष्ट उल्लेख तो नहीं मिलता फिर भी इसकी प्राचीनता से ऐसा अंदाजा लगाया जाता है।
कहते हैं इस बावड़ी में एक सुरंग है जिसे बंद कर दिया गया है। तीन चार मंजिला इस बावड़ी में अनेक कमरे हे। कहते हैं कि यह बावड़ी माचलपुर बसाहट से दूर होने के कारण इसमें चोर अपना चोरी का माल छुपाते थे। लोग कहते हैं कि इसमें बेशकीमती खजाना छुपा हुआ है, पर इन डरावने कमरों में कोई घुसने की हिम्मत नहीं करता। कहने को तो यह बावड़ी अब पुरातत्व विभाग के अधीन है लेकिन कभी इसके संरक्षण और सौंदर्यीकरण हेतु प्रयास नहीं किया। इसका पानी भी काफी मट मैला रहता है। इसी प्रकार यहां चनिहारी ,पनिहारी के स्मारक और केवड़ा बावड़ी भी पुरातन पाषाण कला और कारीगरी के उदाहरण है जिन्हें संरक्षण की दरकार है।

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