
दिल्ली में सत्ता तक पहुंचने के लिए बीजेपी ने इस बार पूरी ताकत झोंक दी है। एग्जिट पोल के नतीजे पार्टी की मेहनत को रंग लाते दिख रहे हैं, जिससे 27 साल बाद दिल्ली में बीजेपी की वापसी के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार बीजेपी उन 11 सीटों पर जीत दर्ज कर पाएगी, जहां अब तक वह कभी नहीं जीती?
दिल्ली की 11 सीटें जहां बीजेपी कभी नहीं जीत पाई
1993 से लेकर अब तक दिल्ली में सात विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, और अब 2025 में आठवीं बार चुनाव हुए हैं। इस दौरान बीजेपी ने कई सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन 11 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां पार्टी कभी भी विजयी नहीं हुई।
इन सीटों पर बीजेपी का अब तक खाता नहीं खुला:
- अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटें:
- कोंडली
- अंबेडकर नगर
- मंगोलपुरी
- सुल्तानपुर माजरा
- देवली
- मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटें:
- ओखला
- मटिया महल
- सीलमपुर
- बल्लीमारान
- जंगपुरा
- विकासपुरी
बीजेपी ने कई बार सत्ता में आने की कोशिश की, लेकिन इन मुस्लिम और दलित बहुल सीटों पर जीत दर्ज करना अब तक उसके लिए असंभव रहा है।
क्या बदलेगा इस बार चुनावी समीकरण?
बीजेपी ने इस बार चुनावी रणनीति में कई नए बदलाव किए हैं, जिनमें दलित और मुस्लिम वोटबैंक को साधने के लिए खास रणनीति तैयार की गई।
- दलित वोट बैंक पर फोकस:
- बीजेपी ने अपने दलित नेताओं को उन इलाकों में प्रचार के लिए उतारा, जहां पार्टी की पकड़ कमजोर थी।
- स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर प्रबुद्ध वर्ग, RWA मेंबर्स, मंदिरों के पुजारी और अन्य प्रभावशाली लोगों से समर्थन मांगा गया।
- मुस्लिम बहुल सीटों पर नई रणनीति:
- बीजेपी ने इन सीटों पर कोई मुस्लिम प्रत्याशी नहीं उतारा, जबकि विपक्षी पार्टियों ने मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा।
- पार्टी ने “मुस्लिम बनाम मुस्लिम” की लड़ाई में हिंदू प्रत्याशियों को उतारकर ध्रुवीकरण की रणनीति अपनाई।
- AIMIM के प्रचार का भी बीजेपी को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इससे विपक्षी मुस्लिम वोटों का बंटवारा संभव है।
क्या 2025 में बीजेपी का “सीक्रेट प्लान” होगा सफल?
दिल्ली की सत्ता में वापसी के लिए बीजेपी ने इस बार एग्रेसिव कैंपेन चलाया, जिससे पार्टी को मजबूत स्थिति में माना जा रहा है। एग्जिट पोल में भी बीजेपी की बढ़त दिख रही है।


