हनुमान टेकरी पर हुई शनिदेव की मूर्ति स्थापना

शाढ़ौरा से देवेश ओझा की रिपोर्ट
बजरंगबली के भक्तों से रुष्ट नहीं होते शनिदेव
शाढौरा । स्थानीय हनुमान टेकरी पर गुरूवार को शनिदेव भगबान की प्रतिमा की स्थापना की गई । माना जाता है कि शनिवार को हनुमानजी के दर्शन से शनिदेव की कुदृष्टि नही पडती है आस्था एवं बिशवास का प्रतिक हनुमान टेकरी पर भक्तगण दूर – दूर से मगलबार एवं शनिबार को दर्शन करने के लिए पहुचते है आए दिन टेकरी पर लोगों द्वारा कथा एवं भंडारे का आयोजन किए जाते हैं जहां हनुमान जी के दर्शन मात्र से ही भक्तों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है वैसे तो मंगलवार का दिन बजरंगबली का दिन माना जाता है लेकिन शनिवार का दिन सबसे महत्वपूर्ण माना गया है शास्त्रों में शनिदेव को एक अहम स्थान दिया गया है। मानाजाता है कि शनिदेव कर्म प्रधान देवता हैं और वह मनुष्य के कर्मो के अनुसार फल देते हैं। इसीलिए शनिवार का दिन शनिदेव की पूजा के लिए खास माना जाता है। शनिदेव के अशुभ प्रभाव को कम करने व उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रकार के पूजन किए जाते है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब हनुमान जी पर जब शनि की दशा प्रांरभ हुई उस समय समुद्र पर रामसेतु बांधने का कार्य चल रहा था। राक्षस पुल को हानि पहुंचा सकते हैं, यह आंशका सदैव बनी हुई थी। इसलिए पुल की सुरक्षा का दायित्व हनुमान जी को सौपा गया था। लेकिन रामकाज में लगे हनुमान पर शनि की दशा आरम्भ होनी थी।
हनुमान जी के बल और की
र्ति को जानते हुए शनिदेव ने उनके पास पहुंच कर शरीर पर ग्रह चाल की व्यवस्था के नियम को बताते हुए अपना आशय बताया। जिस पर हनुमान जी ने कहा कि वे प्रकृति के नियम का उल्लघंन नहीं करना चाहते लेकिन राम-सेवा उनके लिए सर्वोपरि हैं।
उनका आशय था कि राम-काज होने के बाद ही शनिदेव को अपना पूरा शरीर समर्पित कर देंगे परंतु शनिदेव ने हनुमान जी का आग्रह नहीं माना। और वे अरूप होकर जैसे ही हनुमान जी के शरीर पर आरूढ़ हुए, उसी समय हनुमान जी ने विशाल पर्वतों से टकराना शुरू कर दिया। शनिदेव शरीर पर जिस अंग पर आरूढ़ होते, महाबली हनुमान उसे ही कठोर पर्वत शिलाओं से टकराते रहे और शनिदेव बुरी तरह घायल हो गए। उनके शरीर का एक-एक अंग आहत हो गया। शनिदेव जी ने हनुमान जी से अपने किए की क्षमा मांगी
तब हनुमान जी ने शनिदेव से वचन लिया कि वे उनके भक्तों को कभी कष्ट नहीं पहुंचाएगें। आश्वस्त होने के बाद हनुमानजी ने कृपा करते हुए शनिदेव को तिल का तेल दिया, जिसे लगाते ही उनकी पीड़ा शांत हो गई। तब से शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए उन पर तिल के तेल चढ़ाया जाता है। हनुमानजी ने उनके कष्टों को दूर करके उनकी रक्षा की थी इसलिए शनिदेव ने हनुमानजी को यह वचन दिया कि जो भी जातक शनिवार को हनुमानजी की पूजा करेगा वह उसे कोप का भाजन नहीं बनाएंगे। यही वजह है कि जो भी भक्त शनिवार के दिन हनुमानजी की पूजा करता है और शनिबार के दिन तेल चढाता है शनिदेव की कुदृष्टि उसपर नहीं पड़ती। उसे हनुमानजी के साथ ही शनिदेव का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।
शाढौरा फाइल फोटो हनुमान टेकरी हनुमान टेकरी पर कोई शनिदेव की प्रतिमा की स्थापना


